देश के सबसे व्यापक सार्वजनिक सेवा तंत्रों में से एक इंडिया पोस्ट अब न सिर्फ देश के दूरस्थ इलाकों तक अपनी पहुंच मजबूत कर चुका है, बल्कि भविष्य में खुद को एक विश्व-स्तरीय, डिजिटल-इनेबल्ड लॉजिस्टिक्स सेवा के रूप में विकसित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि आज भारत में 1.64 लाख डाकघर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिनमें एक बड़ी संख्या उन क्षेत्रों में है जो कभी नक्सल हिंसा (LWE) से प्रभावित रहे हैं।
2.78 लाख ग्रामीण डाक सेवकों को सिंधिया का सम्मान – “वे सिर्फ सेवा नहीं, भावनाएँ पहुँचाते हैं”
लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान सिंधिया ने विशेष तौर पर 2.78 लाख ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा
“ग्रामीण डाक सेवक दिन-रात मेहनत करते हैं। वे केवल कारोबार ही नहीं, बल्कि एक इंसान की भावना को दूसरे तक पहुँचाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि इन सेवकों की बदौलत देश के सबसे दूरस्थ गाँव भी आज डिजिटल और वित्तीय सेवाओं से जुड़े हैं।
नेटवर्क में ऐतिहासिक विस्तार — 3.5 साल में 10,170 नए डाकघर
सिंधिया ने जानकारी दी कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में 10,170 नए पोस्ट ऑफिस स्थापित किए गए हैं। इसे इंडिया पोस्ट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है।
LWE प्रभावित राज्यों में 4,903 नए डाकघर
नक्सल प्रभावित राज्यों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए सरकार ने विशेष पहल की है। 4,903 नए डाकघर इन्हीं क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं।
इससे लाखों नागरिकों को आख़िरी छोर तक सेवाएँ मिल सकेंगी।
अनबैंक्ड गांवों में डाकघरों की पहुँच
डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 5,746 अनबैंक्ड गांवों में पोस्ट ऑफिसों को मंजूरी दी थी। इनमें से 5,657 डाकघर पहले से ही चालू हो चुके हैं, जो कुल का 97% है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों को बैंकिंग, बीमा और डिजिटल सेवाओं तक आसान पहुंच मिल रही है।
405 करोड़ रुपये की बड़ी निवेश योजना – पुराने भवनों का जीर्णोद्धार
सिंधिया ने बताया कि इंडिया पोस्ट के ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने 405 करोड़ रुपये की राशि पोस्ट ऑफिस भवनों के निर्माण और नवीनीकरण पर खर्च की है। इसमें विशेष रूप से शामिल हैं—
49 हेरिटेज पोस्ट ऑफिस, जिन्हें सांस्कृतिक और संस्थागत धरोहर माना जाता है। कई पुराने कार्यालयों का आधुनिकीकरण। नई सुविधाओं के साथ कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी 25,000 सरकारी स्वामित्व वाले पोस्ट ऑफिसों के नवीनीकरण की जरूरत है, जिसके लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी।
डिजिटल इंडिया के तहत बड़ा बदलाव – ‘बिजनेस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग (BPR)’
इंडिया पोस्ट अब अपनी कार्यप्रणाली को भविष्य की मांगों के अनुसार ढालने के लिए एक व्यापक BPR (Business Process Re-engineering) कार्यक्रम चला रहा है। इसके अंतर्गत—
सेवाओं को तेज़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम
फर्स्ट-माइल, मिडिल-माइल और लास्ट-माइल डिलीवरी सिस्टम का पुनर्गठन
तकनीक आधारित ट्रैकिंग और सेवा रफ्तार में सुधार
डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग और लॉजिस्टिक्स ऑटोमेशन जैसी नई सुविधाएँ
सिंधिया के अनुसार, BPR का उद्देश्य इंडिया पोस्ट को सिर्फ डाक सेवा नहीं, बल्कि एक विश्व-स्तरीय लॉजिस्टिक्स कैरियर के रूप में स्थापित करना है।
वैश्विक मानकों का अध्ययन और ऑटोमेशन
मंत्री ने बताया कि इंडिया पोस्ट उन देशों के मॉडल का अध्ययन कर रहा है, जिनकी लॉजिस्टिक्स सेवाएँ दुनिया में शीर्ष पर मानी जाती हैं।
भारत में ऑटोमेटेड मेल प्रोसेसिंग जैसी आधुनिक तकनीक को तेजी से शामिल किया जा रहा है।
पार्सल लॉजिस्टिक्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा रहा है।
भविष्य में ड्रोन-आधारित डिलीवरी मॉडल और स्मार्ट रूटिंग पर भी काम किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 11 वर्षों में बड़ा परिवर्तन
सिंधिया ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने इंडिया पोस्ट के प्रति “अभूतपूर्व प्राथमिकता” दिखाई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाने में इंडिया पोस्ट बैंक की भूमिका बढ़ी
डिजिटल पोस्ट ऑफिस, स्मार्ट पार्सल हब और ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स जैसी नई शुरुआतें हुईं
भारतीय डाक को डिजिटल भुगतान और फाइनेंसियल सेवाओं के साथ जोड़ा गया
आगे की राह – भारत का सबसे भरोसेमंद डिलीवरी नेटवर्क अब डिजिटल पावरहाउस बनने की ओर
सिंधिया ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ डाक सेवाएँ बढ़ाना नहीं, बल्कि इंडिया पोस्ट को एक ऐसी आधुनिक, तेज़ और डिजिटल रूप से सक्षम लॉजिस्टिक्स प्रणाली बनाना है, जिस पर देश का हर नागरिक भरोसा कर सके।
उन्होंने कहा “भारत पोस्ट आज दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में इसे एक हाई-टेक, ग्राहक-उन्मुख और विश्व-स्तरीय लॉजिस्टिक नेटवर्क में बदलें।”