असम को मिली बड़ी सौगात…गुवाहाटी में भारत का पहला “प्रकृति-थीम्ड” एयरपोर्ट टर्मिनल
गुवाहाटी/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह टर्मिनल न केवल पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट टर्मिनल है, बल्कि यह भारत का पहला “प्रकृति-थीम्ड” एयरपोर्ट टर्मिनल भी है। इस परियोजना को असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट के लिए कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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असम को मिली बड़ी सौगात
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मोदी करेंगे नए टर्मिनल उद्घाटन
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भारत का पहला प्रकृति-थीम्ड एयरपोर्ट
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गुवाहाटी एयरपोर्ट की ऐतिहासिक छलांग
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नॉर्थ ईस्ट कनेक्टिविटी को बढ़ावा
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बैंबू ऑर्किड थीम पर आधारित
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पर्यटन और विकास को गति
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पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा टर्मिनल
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आधुनिक तकनीक से लैस हवाई अड्डा
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एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती
यह नया टर्मिनल ‘बैंबू ऑर्किड्स’ (Bamboo Orchids) थीम पर आधारित है। इसके डिजाइन में असम और पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को खास तौर पर दर्शाया गया है। टर्मिनल की वास्तुकला में ऑर्किड फूल (कोपोउ फूल), बांस, ब्रह्मपुत्र नदी, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और माजुली द्वीप से प्रेरणा ली गई है। यह डिजाइन न केवल यात्रियों को एक अनूठा अनुभव देगा, बल्कि असम की समृद्ध जैव-विविधता और संस्कृति को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करता ळै।
करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह टर्मिनल मौजूदा सुविधा की तुलना में लगभग सात गुना बड़ा है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सके। जब यह टर्मिनल पूरी तरह से परिचालन में आ जाएगा, तब यह वर्ष 2032 तक सालाना करीब 1.31 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इसके साथ ही, यहां प्रति घंटे 34 हवाई यातायात गतिविधियों (एयर ट्रैफिक मूवमेंट्स) को संभालने की क्षमता होगी, जो पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सबसे अधिक है।
नए टर्मिनल में आधुनिक तकनीक और यात्रियों की सुविधा पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें डिजी यात्रा (DigiYatra) गेट्स लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को फेसियल रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से बिना कागजी दस्तावेजों के तेज और सुगम प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एयरपोर्ट के संचालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और परिचालन क्षमता में सुधार होगा।
यात्रियों के लिए स्वचालित बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, उन्नत इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS), और अत्याधुनिक रनवे व एयरफील्ड सिस्टम भी विकसित किए गए हैं। इन सुविधाओं से न केवल उड़ानों की समयबद्धता बढ़ेगी, बल्कि खराब मौसम के दौरान भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ सुनिश्चित हो सकेगी। यह कदम असम को एक प्रमुख एविएशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए राजनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। केंद्र सरकार लंबे समय से पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर देती रही है। सड़क, रेल, हवाई संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बीते वर्षों में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। गुवाहाटी एयरपोर्ट का यह नया टर्मिनल उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है। यह एयरपोर्ट टर्मिनल असम के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगा। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, माजुली द्वीप, कामाख्या मंदिर और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच अब और आसान होगी। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से न केवल देश के अन्य हिस्सों से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद अहम है। निर्माण के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिला, वहीं भविष्य में एयरपोर्ट के संचालन, सुरक्षा, ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और असम को व्यापार व उद्योग के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, गुवाहाटी के लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नया टर्मिनल न केवल एक आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजना है, बल्कि यह असम की प्रकृति, संस्कृति और विकास की कहानी को भी दर्शाता है। भारत का पहला प्रकृति-थीम्ड एयरपोर्ट टर्मिनल बनने के साथ ही यह पूर्वोत्तर को वैश्विक मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होने जा रहा है।