Census 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना का शेड्यूल जारी, अप्रैल से सितंबर तक पहला चरण; जानिए पूरी टाइमलाइन और खासियत

India first digital census schedule released first phase from April to September

Census 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना का शेड्यूल जारी, अप्रैल से सितंबर तक पहला चरण; जानिए पूरी टाइमलाइन और खासियत

नई दिल्ली। भारत एक ऐतिहासिक पड़ाव पर खड़ा है। साल 2027 में होने वाली जनगणना न सिर्फ देश की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने Census 2027 के पहले चरण की टाइमलाइन जारी कर दी है। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाली जनगणना तकनीक, डेटा और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से अब तक की सबसे आधुनिक जनगणना होगी।

यह सवाल जो पूछे जाएंगे

आपकी उम्र, लिंग और शिक्षा
आपका धर्म, आपकी मातृभाषा, भाषाएं
दिव्यांगता, आपकी सामाजिक स्थिति, आपकी जाति
आपका पेशा, माइग्रेशन और प्रजनन संबंधी विवरण
जनगणना की मुख्य अवधि फरवरी 2027
संशोधन 1–5 मार्च 2027 तक होगा
बर्फबारी वाले क्षेत्र में सितंबर 2026
संशोधन दौर 1–5 अक्टूबर 2026 तक होगा

जानें आखिर क्यों जरूरी है जनगणना?

जनगणना किसी भी देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया होती है। यह ग्राम, नगर और वार्ड स्तर तक प्राथमिक (प्राइमरी) डेटा का सबसे बड़ा स्रोत होती है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सरकार नीतियां बनाती है, संसाधनों का आवंटन करती है और विकास योजनाओं की दिशा तय होती है। जनगणना में आवास की स्थिति, घरों में उपलब्ध सुविधाएं, संपत्तियां, जनसांख्यिकी, धर्म, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST), भाषा, साक्षरता, शिक्षा, आर्थिक गतिविधियां, प्रवास और प्रजनन दर जैसे तमाम मापदंडों पर सूक्ष्म स्तर (माइक्रो लेवल) की जानकारी जुटाई जाती है। यही वजह है कि जनगणना को देश की “डेटा रीढ़” भी कहा जाता है।

Census 2027: कानूनी ढांचा

भारत में जनगणना कराने का कानूनी आधार जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत तय किया गया है। इन्हीं कानूनों के अंतर्गत Census 2027 का आयोजन किया जाएगा। यह स्वतंत्रता के बाद देश की 8वीं जनगणना होगी। censusindia.gov.in के अनुसार, केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 मार्च 2027, रात 12:00 बजे तय की है। हालांकि बर्फबारी वाले इलाकों के लिए यह तारीख अलग रखी गई है। यहां 1 अक्टूबर 2026 (लद्दाख और अत्यधिक हिमपात वाले क्षेत्र)।

दो चरणों में होगी जनगणना

Census 2027 को दो प्रमुख चरणों में पूरा किया जाएगा

पहला चरण: हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना

अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026

हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिनों तक चलेगा। इसमें घरों की गिनती, आवास की स्थिति, सुविधाएं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना

सामान्य क्षेत्रों में: फरवरी 2027
बर्फबारी वाले क्षेत्रों में: सितंबर 2026 को इसमें प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, लिंग, शिक्षा, रोजगार, जाति, धर्म आदि का विवरण दर्ज किया जाएगा

पहली बार ‘Self Enumeration’ का विकल्प

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, Census 2027 में स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा। इसका मतलब है कि लोग चाहें तो खुद ही डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी भर सकेंगे। यह प्रक्रिया हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में उपलब्ध होगी।

क्यों खास है डिजिटल जनगणना?

Census 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है—

मोबाइल ऐप के जरिए डेटा कलेक्शन
केंद्रीय डिजिटल पोर्टल से निगरानी
GIS (Geographic Information System) तकनीक का इस्तेमाल

रियल-टाइम डेटा वैलिडेशन
कागजी फॉर्म की जरूरत नहीं

GIS तकनीक की मदद से हर घर और क्षेत्र को डिजिटल मैप पर चिन्हित किया जाएगा, जिससे डेटा की सटीकता और पारदर्शिता कई गुना बढ़ेगी।

30 लाख फील्ड अधिकारी होंगे शामिल

दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया में लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी और गणनाकर्मी शामिल होंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण उन्हें रियल-टाइम गाइडेंस, डेटा एरर अलर्ट और तेज रिपोर्टिंग की सुविधा मिलेगी।

‘Census as a Service’ (CaaS) की शुरुआत

सरकार ने जनगणना डेटा के बेहतर उपयोग के लिए Census-as-a-Service (CaaS) मॉडल की घोषणा की है। इसके तहत मंत्रालयों और राज्यों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय, एक्शन योग्य और डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। नीति-निर्माण से जुड़े सभी जरूरी सवालों के जवाब “एक क्लिक” में मिल सकेंगे।

जाति गणना भी होगी शामिल

नवीनतम जनगणना में जाति पहचान (Caste Enumeration) को भी शामिल किया जाएगा, जो लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इससे सामाजिक न्याय और लक्षित योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

क्यों हुई देरी?

असल में जनगणना हर 10 साल में होती है और इसकी प्रक्रिया 2021 में शुरू होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया। अब सरकार ने इसे पूरी तैयारी के साथ डिजिटल स्वरूप में आयोजित करने का फैसला किया है। 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11,718.2 करोड़ रुपये की लागत से Census 2027 आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। Census 2027 सिर्फ जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है। तकनीक, पारदर्शिता और सटीक डेटा के साथ यह जनगणना आने वाले दशकों की नीतियों और विकास योजनाओं की नींव रखेगी। भारत की यह पहली डिजिटल जनगणना देश के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

Exit mobile version