भारत में सूचना सुरक्षा पर खर्च तेज़ी से बढ़ रहा है और 2026 तक यह करीब 3.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 की तुलना में लगभग 11.7% अधिक होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियां अब केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति अपना रही हैं। AI-आधारित हमलों और सख्त नियमों के चलते संस्थान अपने डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दे रहे हैं।
सुरक्षा सॉफ्टवेयर बना सबसे बड़ा और तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र
रिसर्च एजेंसी Gartner की रिपोर्ट बताती है कि 2026 में सुरक्षा सॉफ्टवेयर पर सबसे अधिक खर्च होने की संभावना है। अनुमान है कि इस सेगमेंट में करीब 12.4% की वृद्धि होगी, क्योंकि कंपनियां क्लाउड और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। डिजिटल परिवर्तन के बढ़ते दायरे के साथ संगठनों के सामने डेटा सुरक्षा और सिस्टम सुरक्षा दोनों बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
नेटवर्क सुरक्षा और सेवाओं में भी तेज विस्तार की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक नेटवर्क सुरक्षा और सुरक्षा सेवाओं पर खर्च में भी करीब 11.1% की वृद्धि देखी जा सकती है। कुल सूचना सुरक्षा खर्च 2026 में लगभग 3,435 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। कंपनियां तेजी से बदलते साइबर खतरों से निपटने के लिए उन्नत समाधान अपनाने में निवेश बढ़ा रही हैं।
मैनेज्ड सुरक्षा सेवाओं की मांग सबसे तेज़ गति से बढ़ रही
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मैनेज्ड सिक्योरिटी सर्विसेज की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह उप-सेगमेंट करीब 15.1% की दर से विस्तार करता दिख रहा है। शैलेंद्र उपाध्याय ने कहा कि एंटरप्राइज अब AI-आधारित खतरों से निपटने और सख्त नियामकीय ढांचे का पालन करने के लिए अधिक निवेश कर रहे हैं। भारतीय CISO भी अब सक्रिय और पूर्वानुमान आधारित सुरक्षा मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।
पहचान आधारित हमले और नए नियम बना रहे चुनौतीपूर्ण माहौल
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि क्रेडेंशियल चोरी और डीपफेक जैसे पहचान आधारित हमले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे ITDR जैसे समाधान अहम हो गए हैं। एलेक्स माइकल्स के अनुसार, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून और वैश्विक AI नियमों ने अनुपालन को और जटिल बना दिया है। उन्होंने साइबर सुरक्षा नेताओं को सलाह दी कि वे केवल नियंत्रण आधारित सोच से आगे बढ़कर सुरक्षित और स्केलेबल बिजनेस इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली रणनीति अपनाएं। साथ ही कानूनी, व्यापार और प्रोक्योरमेंट टीमों के साथ बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है।