बांग्लादेश चुनाव से पहले भारत सतर्क….ढाका से राजनयिकों के परिवार लौटे

India cautious ahead of Bangladesh elections

बांग्लादेश चुनाव से पहले सतर्क भारत, ढाका से राजनयिकों के परिवार लौटे

चुनावी माहौल में बढ़ा खतरा, भारत ने ढाका से परिवारों को बुलाया

 

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव और जनमत संग्रह से पहले राजनीतिक और सामाजिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में भारत ने एक अहम और एहतियाती कदम उठाते हुए बांग्लादेश में स्थित अपने सभी दूतावासों और राजनयिक मिशनों से अधिकारियों के परिवारों और आश्रितों को स्वदेश वापस बुला लिया है। भारत सरकार का यह फैसला संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम पूरी तरह से सावधानी के उपाय के तहत उठाया गया है। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश के अन्य शहरों में स्थित भारतीय मिशन पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और राजनयिक गतिविधियों में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है। केवल अधिकारियों के परिवारों और आश्रितों को ही अस्थायी रूप से भारत लौटने की सलाह दी गई है। दरअसल, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा हालात को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। दिसंबर 2025 में इस्लामिक युवा नेता शरिफ उस्मान हादी पर हुई गोलीबारी की घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में तनाव फैल गया और सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने भी इस घटनाक्रम के बाद अपने आकलन में संभावित खतरों की आशंका जताई थी।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 17 दिसंबर 2025 को जुलाई ओइक्या मंचो नामक एक कट्टर छात्र संगठन ने भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च निकालने की घोषणा कर दी। हालांकि, बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने इस मार्च को उच्चायोग से काफी दूरी पर ही रोक दिया, लेकिन इस घटना ने भारतीय मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के प्रदर्शन और उग्र गतिविधियां अचानक हिंसक रूप ले सकती हैं।

18 दिसंबर 2025 को शरिफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए। इसी दिन मयमनसिंह में हिंदू समुदाय के एक सदस्य दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर लिंचिंग कर हत्या और फिर शव को जलाने की घटना सामने आई। इस घटना ने न केवल बांग्लादेश में बल्कि भारत में भी गहरी चिंता पैदा की। पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए और केंद्र सरकार पर बांग्लादेश सरकार से कड़ा रुख अपनाने का दबाव बढ़ा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में चुनाव के दौरान अक्सर राजनीतिक टकराव, हिंसा और अस्थिरता देखने को मिलती रही है। ऐसे में भारतीय नागरिकों, खासकर राजनयिक परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही वजह है कि बिना किसी खतरे का इंतजार किए, समय रहते यह निर्णय लिया गया। हालांकि भारत ने यह भी साफ किया है कि इस कदम को राजनयिक संबंधों में कटौती के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच लगातार संवाद जारी है। भारतीय मिशन बांग्लादेशी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में हैं और हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, यह फैसला भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें विदेशों में तैनात अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इससे पहले भी कई देशों में चुनाव या अशांति के दौरान भारत ने इसी तरह के एहतियाती कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सुरक्षा की दृष्टि से सही है, बल्कि इससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में भी आसानी होगी।

बांग्लादेश में चुनावी राजनीति इस समय बेहद ध्रुवीकृत है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है, वहीं जनमत संग्रह को लेकर भी समाज के विभिन्न वर्गों में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। ऐसे माहौल में कट्टरपंथी और उग्र संगठन हालात को भड़काने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे विदेशी मिशनों को निशाना बनाए जाने का खतरा बना रहता है। फिलहाल भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अगर हालात में सुधार होता है और सुरक्षा जोखिम कम होते हैं, तो राजनयिकों के परिवारों की वापसी पर दोबारा विचार किया जा सकता है। तब तक ढाका में भारतीय उच्चायोग और अन्य मिशन अपने कूटनीतिक दायित्वों को पूरी तरह निभाते रहेंगे। कुल मिलाकर, बांग्लादेश चुनाव से पहले भारत का यह कदम सतर्कता, जिम्मेदारी और दूरदर्शिता का संकेत है। यह न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय घटनाक्रमों को लेकर कितना सजग और तैयार है।

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