भारत का सबसे बड़ा दुश्मन सरकार में आएगा? इस पड़ोसी देश को लेकर शशि थरूर के बयान से बढ़ी चिंता?

India biggest enemy came into power Shashi Tharoor statement raises concerns

भारत का सबसे बड़ा दुश्मन सरकार में आएगा? शशि थरूर के बयान से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर (ICS) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। साल 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी इस्लामिस्ट छात्र संगठन ने इतनी बड़ी जीत हासिल की हो। इस नतीजे ने भारत में राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

शशि थरूर का बयान : यह संकेत बेहद गंभीर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस जीत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह घटना भारतीय मीडिया और जनता के लिए शायद छोटी सी लगे, लेकिन इसके नतीजे दूरगामी हो सकते हैं। थरूर ने सवाल उठाया कि क्या फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों में जमात-ए-इस्लामी सरकार का हिस्सा बनेगा और क्या भारत को अपने सबसे बड़े दुश्मन से सरकार के स्तर पर निपटना पड़ेगा?

क्यों बढ़ीं भारत की चिंता?

भारत के लिए जमात-ए-इस्लामी लंबे समय से संदेह का विषय रहा है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान इस पर पाकिस्तानी सेना का साथ देने के आरोप लगे थे। भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क को समर्थन देने के भी गंभीर आरोप हैं।

भारत में यह संगठन प्रतिबंधित है।

ऐसे में अगर बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी राजनीतिक रूप से बड़ी ताकत बनता है और चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति में आता है, तो भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां कई गुना बढ़ सकती हैं।

बदलता राजनीतिक परिदृश्य

विशेषज्ञों के मुताबिक, बांग्लादेश में जनता का दोनों मुख्य पार्टियों—अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP)—से मोहभंग हो रहा है। अवामी लीग पर भ्रष्टाचार और तानाशाही रवैये के आरोप हैं। BNP भी लगातार कमजोर होती जा रही है। इसी खाली जगह को जमात-ए-इस्लामी भरने की कोशिश कर रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ICS की जीत सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम चुनावों से पहले मतदाताओं के मूड का संकेत भी देती है।

विपक्ष का आरोप : “यह चुनाव मजाक”

BNP ने ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को खारिज करते हुए इन्हें “मैनिपुलेटेड” बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह एक योजनाबद्ध फर्ज़ीवाड़ा है और इनका असली मकसद जमात को बढ़ावा देना है। हालांकि, चुनावी पर्यवेक्षकों का मानना है कि मतदाताओं में असंतोष इतना गहरा हो चुका है कि इस्लामी संगठनों को अप्रत्याशित समर्थन मिल रहा है।

भारत के लिए बड़ा सवाल

विश्लेषक मानते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में हो रहा यह बदलाव भारत के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती बन सकता है। सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और आईएसआई नेटवर्क की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर जमात सत्ता में आती है, तो दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है। ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का परिणाम सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाले आम चुनावों के लिए ट्रेलर भी माना जा रहा है। शशि थरूर का बयान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत को अब अपने पड़ोसी देश की राजनीति पर और ज्यादा सतर्क निगाह रखनी होगी। सवाल यही है कि क्या भारत का सबसे बड़ा दुश्मन वाकई सरकार में शामिल होगा? (प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version