भारत की अग्नि-V बंकर-बस्टर मिसाइल… ये है दुश्मन के बंकरों को चीरने वाला ‘महाशक्ति हथियार’
भारत अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO ने अग्नि-V अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ICBM के एक संशोधित संस्करण पर काम शुरू कर दिया है, जो एक अत्याधुनिक बंकर-बस्टर वारहेड ले जाने में सक्षम होगा। यह वारहेड 7500 किलोग्राम वजनी होगा और मैक 8 से मैक 20 (आवाज़ से 8 से 20 गुना तेज) की हाइपरसोनिक गति से हमला कर सकेगा।
- US से भी खतरनाक है यह बंकर-बस्टर बम…!
- दुश्मनों के दांत खट्टे करेगी मिसाइल अग्नि-V
- केवल मिसाइल नहीं…रणनीतिक प्रतिरोध की शक्ति है यह
- दुश्मनों के कभी नष्ट न होने वाले बंकर भी अब सुरक्षित नहीं
- बंकर-बस्टर मिसाइल से भारत को अमेरिका…
- … रूस और चीन जैसे रक्षा शक्तियों की बराबर
- भारत की सैन्य स्वायत्तता को नई ऊंचाई देती है यह मिसाइल
Defence Research and Development Organisation के अनुसार अग्नि-V का मूल संस्करण 5000 किमी से अधिक दूरी तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। अब जो नया संस्करण विकसित किया जा रहा है। वह विशेष रूप से दुश्मन के भूमिगत बंकरों, परमाणु ठिकानों और संरक्षित सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसके दो नए बंकर-बस्टर संस्करणों की रेंज 2500 किमी होगी।
सीधे अमेरिका से मुकाबला
यह मिसाइल अमेरिका के GBU-57 बंकर-बस्टर बम को टक्कर देगी, जिसका वजन लगभग 13,600 किलोग्राम है और जो B-2 बमवर्षक विमान से गिराया जाता है। भारत की अग्नि-V मिसाइल भले ही वजन में थोड़ी हल्की हो, लेकिन इसकी हाइपरसोनिक गति और सटीक मार क्षमता इसे रणनीतिक रूप से अत्यधिक प्रभावशाली बनाती है।
क्यों है यह मिसाइल जरूरी?
भारत की सीमाओं पर पाकिस्तान और चीन ने कई सुरक्षित भूमिगत सैन्य बंकर बना रखे हैं। विशेष रूप से, पहाड़ी क्षेत्रों में ये बंकर सामान्य बमबारी से सुरक्षित रहते हैं। लेकिन अग्नि-V का बंकर-बस्टर संस्करण ऐसी संरचनाओं को भी ध्वस्त करने में सक्षम होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपने रक्षा तंत्र में तेजी से बदलाव किए हैं। चीन द्वारा तिब्बत क्षेत्र में और पाकिस्तान द्वारा POK में बनाए गए सामरिक बंकरों की बढ़ती संख्या भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन रही थी।
अमेरिका-ईरान संघर्ष से मिली प्रेरणा
हाल ही में अमेरिका की ओर से पिछले माह 22 जून 2025 को ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र पर GBU-57 बंकर-बस्टर बम का प्रयोग किया गया था। यह संयंत्र पहाड़ियों के नीचे करीब 100 मीटर की गहराई में स्थित था। जिसे कोई भी सामान्य बम नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। लेकिन इस हमले ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि जमीन के नीचे भी लड़े जाएंगे। लिहाजा भारत ने इससे सबक लेते हुए अपनी मिसाइल प्रणाली को इसी दिशा में और अधिक उन्नत किया है। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)