6G तकनीक के लिए बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
भारत सरकार ने 6G तकनीक के विकास को तेज़ करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। संचार मंत्रालय ने संसद को जानकारी दी कि टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) योजना के तहत 6G से जुड़े 104 रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब ₹271 करोड़ है।
राज्यसभा में दी गई जानकारी
संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने ‘भारत 6G विज़न डॉक्यूमेंट’ जारी किया है। इस दस्तावेज़ में देश में 6G तकनीक के रिसर्च, विकास और भविष्य में तैनाती के लिए पूरी रणनीति और रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें स्पेक्ट्रम बैंड की पहचान भी शामिल है।
6G स्पेक्ट्रम के लिए तैयार रोडमैप
सरकार ने 6G सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप भी तैयार किया है। इसमें अगले दस वर्षों के दौरान विभिन्न रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड में स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और संभावित समयसीमा की जानकारी दी गई है। यह रोडमैप तीन चरणों में विभाजित है—शॉर्ट टर्म (2025–2026), मीडियम टर्म (2027–2030) और लॉन्ग टर्म (2031–2035)।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रहा अध्ययन
संचार मंत्रालय के अनुसार 6G तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अध्ययन किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने IMT-2030 के लिए कई सिफारिशें जारी की हैं, जो भविष्य की 6G तकनीकों के लिए वैश्विक मानक के रूप में विकसित की जा रही हैं।
रिपोर्ट्स में तकनीकी पहलुओं का अध्ययन
ITU की रिपोर्ट्स में 6G नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम की व्यवहार्यता, सिग्नल प्रसार, एंटीना तकनीक और भविष्य के मोबाइल कम्युनिकेशन सिस्टम की तैनाती जैसे पहलुओं पर भी विस्तृत अध्ययन किया गया है।
TTDF योजना से बढ़ रहा स्वदेशी अनुसंधान
टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड योजना के जरिए देश में स्वदेशी टेलीकॉम रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत कुल 136 रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 104 प्रोजेक्ट्स 6G तकनीक से जुड़े हैं।
6G से जुड़ी कई उन्नत तकनीकों पर काम
इन प्रोजेक्ट्स में 6G THz टेस्टबेड, ट्रांसमीटर मॉड्यूल, सेल-फ्री एक्सेस पॉइंट, री-कन्फिगरेबल इंटेलिजेंट सरफेस हार्डवेयर सिस्टम और 6G नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग के उपयोग जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है।
देशभर में 5G नेटवर्क का विस्तार
सरकार ने यह भी बताया कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5G सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। अब तक देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक 5G नेटवर्क पहुंच चुका है। 28 फरवरी 2026 तक पूरे देश में 5.23 लाख 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) स्थापित किए जा चुके हैं।
कई क्षेत्रों में बढ़ रहा 5G का उपयोग
दूरसंचार विभाग 5G तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए कई पहल कर रहा है। टेलीमेडिसिन, प्रिसिजन एग्रीकल्चर, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में 5G आधारित एप्लिकेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्वदेशी 5G टेस्ट बेड का निर्माण
सरकार ने ₹224 करोड़ की लागत से स्वदेशी 5G टेस्ट बेड के विकास को भी समर्थन दिया है। इसे IIT मद्रास, IIT दिल्ली, IIT हैदराबाद, IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, IISc बेंगलुरु, SAMEER और CEWiT चेन्नई जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है। मई 2022 में प्रधानमंत्री ने इसे देश को समर्पित किया था।
देशभर में बने 100 से ज्यादा 5G लैब
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में 5G एप्लिकेशन विकसित करने के लिए देशभर में 100 से अधिक 5G लैब स्थापित किए गए हैं। इन लैब्स के लिए ₹97.67 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
भारत 6G एलायंस का गठन
सरकार ने ‘भारत 6G एलायंस’ का भी गठन किया है। इसमें उद्योग, अकादमिक संस्थान, रिसर्च संगठन और स्टैंडर्ड्स बॉडीज शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत के 6G विज़न के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करना और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है।