उत्तराखंड जारी बादल फटने की घटनाएं…अब नौगांव में फटा बादल..उफान पर नाला, जलमग्न हुए घर और दुकान
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। ताज़ा घटना उत्तरकाशी जनपद के नौगांव बाजार स्थित स्योरी फल पट्टी की है, जहां शनिवार देर रात बादल फटने से देवलसारी गदेरे में अचानक उफान आ गया। नाले का पानी देखते ही देखते आसपास के घरों और दुकानों में घुस गया। कई दोपहिया वाहन बह गए और एक कार मलबे में दब गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया, वहीं खतरे को देखते हुए लोगों ने अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों का रुख किया।
नौगांव बाजार में मची अफरातफरी
वाहन और मकान मलबे में दबे
मलबे में दबे मकान और दुकानें
बताया जा रहा है कि एक आवासीय भवन पूरी तरह गदेरे के मलबे में दब गया है। आधा दर्जन से अधिक घरों और दुकानों में पानी भर जाने से लोगों का सामान भी भारी नुकसान की चपेट में आ गया। देवलसारी गदेरे में बहाव इतना तेज़ था कि वहां खड़ी एक मिक्चर मशीन और कई बाइक बह गईं।
स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। रातभर राहत कार्य चलता रहा। प्रभावित परिवारों को अस्थायी शिविरों में शिफ्ट किया गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के मुताबिक हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
पहले अतिवृष्टि की खबर, फिर बादल फटने का खुलासा
शुरुआत में सूचना आई कि नौगांव के बीच बहने वाला नाला अतिवृष्टि के कारण उफान पर है। भारी बारिश की वजह से कई दुकानों और घरों में पानी घुस गया और सड़क पर खड़े कई वाहन बह गए। बाद में प्रशासन ने पुष्टि की कि यह बादल फटने की घटना थी, जिसने पूरे इलाके में तबाही मचा दी।
एक माह पहले भी मची थी तबाही
यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक माह पहले, 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने से खीरगंगा में भयंकर बाढ़ आई थी। उस हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग मलबे में दब गए थे। उस समय कई होटल और घर भी बहाव में आकर तबाह हो गए थे। लगातार हो रही इन घटनाओं से लोगों में भय का माहौल है।
IIT रुड़की की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
इस बीच आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट ने राज्य की चिंता और बढ़ा दी है। आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता उत्कृष्टता केंद्र द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, उत्तराखंड के चार पर्वतीय जिले—रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी—भूकंप से होने वाले भूस्खलन के लिए बेहद संवेदनशील पाए गए हैं।
रुद्रप्रयाग सबसे संवेदनशील
शोधकर्ताओं अक्षत वशिष्ठ, शिवानी जोशी और श्रीकृष्ण सिवा सुब्रमण्यम के अध्ययन के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिला सभी परिदृश्यों में सबसे ज्यादा संवेदनशील है। इसके बाद पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी का नंबर आता है। यह अध्ययन 2 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
भूकंपीय गतिविधियों से बड़ा खतरा
रिपोर्ट में साफ किया गया है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां आए दिन भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बड़े पैमाने पर भूकंप आया तो इससे प्रेरित भूस्खलन भविष्य में उत्तराखंड के लिए बेहद गंभीर आपदा का कारण बन सकते हैं।
पहली बार जिला-स्तरीय जोनिंग
अध्ययन की सबसे खास बात यह है कि पहली बार उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में भूकंप से प्रेरित भूस्खलनों के जोखिम की जिला-स्तरीय जोनिंग की गई है। इसमें अलग-अलग भूकंपीय तीव्रता परिदृश्यों और भूकंप की वापसी अवधि के आधार पर खतरे का आकलन किया गया है।
बार-बार क्यों आ रही आपदाएं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार बदलता मौसम पैटर्न, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अनियंत्रित निर्माण कार्य पहाड़ी इलाकों को ज्यादा असुरक्षित बना रहा है। मानसून में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं अब लगभग हर साल सामने आ रही हैं। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ में हाल के वर्षों में आपदाओं का ग्राफ लगातार बढ़ा है।
स्थानीय लोगों में भय, लेकिन उम्मीद भी
बार-बार बादल फटने की घटनाओं से स्थानीय लोग डरे हुए हैं। लोग रातभर जागकर अपने घरों की निगरानी करते हैं। कई परिवार सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते अलर्ट जारी करे और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए तो नुकसान को कम किया जा सकता है। उत्तरकाशी में बादल फटने की यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद नाजुक स्थिति में है। बार-बार बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे की भी परीक्षा ली है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में उत्तराखंड को और बड़ी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रकाश कुमार पांडेय