मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आतिथ्य परंपरा को भी वैश्विक मंच पर स्थापित करता है। वे भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “ग्रामीण रंग पर्यटन संग राज्य स्तरीय उत्सव” को संबोधित कर रहे थे।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। वे “ग्रामीण रंग पर्यटन संग राज्य स्तरीय उत्सव” को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने 241 होम-स्टे का वर्चुअल लोकार्पण कर प्रदेश के ग्रामीण टूरिज्म को नई दिशा दी। इस अवसर पर 10 जिलों के कलेक्टरों, 16 पंचायतों, और होम-स्टे संचालकों को सम्मानित किया गया।
होम-स्टे — अतिथि देवो भव: की संस्कृति का आधुनिक रूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जा रहे होम-स्टे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बना रहे हैं। इन होम-स्टे में पर्यटकों को न केवल परंपरागत आतिथ्य मिलता है, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति, भोजन और रहन-सहन से भी परिचित होते हैं। ये पहल ग्रामीणों के लिए आजीविका और रोजगार का भी मजबूत स्रोत बन रही है।
हेलीकॉप्टर सेवा और वेलनेस टूरिज्म की योजना
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखंड की तर्ज पर मध्यप्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी। साथ ही, वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं, वन्यजीव दर्शन, और धार्मिक स्थलों को एकीकृत किया जाएगा।
रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन और एमओयू
रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के लिए नई माइक्रो वेबसाइट लॉन्च की गई। विभिन्न जिलों की हस्तशिल्प और कलाकृतियों की प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। 61 गांवों में एलईडी और सोलर लाइट लगाने, फिल्म निर्माण, और डिजिटल प्रमोशन के लिए टूरिज्म बोर्ड ने कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
पर्यटकों की संख्या में वृद्धि
मुख्यमंत्री के अनुसार 2020 की तुलना में 2024 में 526% अधिक पर्यटक प्रदेश में आए। खजुराहो, ओरछा, कान्हा, पेंच, और बांधवगढ़ जैसे स्थलों पर होम-स्टे के कारण पर्यटन में नई ऊर्जा आई है। मध्यप्रदेश अब देश के शीर्ष टाइगर स्टेट और वन्यजीव पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है।
सम्मान और संवाद
10 कलेक्टरों और 16 ग्राम पंचायतों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के होम-स्टे संचालकों से सीधा संवाद भी किया। दिव्यांग पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, और स्व-सहायता समूहों की महिलाएं पर्यटन से जुड़कर स्वावलंबी बन रही हैं।
आगामी लक्ष्य
प्रदेश में 1000 होम-स्टे का निर्माण किया जाएगा। 121 गांवों में पहले ही 241 होम-स्टे बनकर तैयार हैं। पन्ना, निवाड़ी, और सीधी के गांवों को राष्ट्रीय पर्यटन ग्राम के रूप में सम्मान मिला है। “पर्यटन केवल यात्रा नहीं, आत्मनिर्भरता का द्वार है। हर गांव को बनाना है टूरिज्म का केंद्र। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस सोच के तहत मध्यप्रदेश, देश में ग्रामीण पर्यटन का मॉडल राज्य बनता दिख रहा है।….(प्रकाश कुमार पांडेय)