“रुद्रप्रयाग का छेनागाड़: बादल फटने से पूरा गांव मलबे में समाया, 8 लोग लापता”

In Rudraprayag Uttarakhand a flood came from the mountain and the whole village disappeared

“रुद्रप्रयाग का छेनागाड़: बादल फटने से पूरा गांव मलबे में समाया, 8 लोग लापता”

“हिमालयी आपदा ने रुद्रप्रयाग का छेनागाड़ गांव उजाड़ दिया… बाजार से लेकर घर-खलिहान तक सब कुछ मलबे में तब्दील… कई लोग लापता, प्रशासन रेस्क्यू में जुटा।” पहाड़ से आया मलबा, पूरा बाजार दबा, वाहन बहे, तालाब-फार्म नष्ट हो गया। 8 लोग लापता (4 स्थानीय, 4 नेपाली मूल के) ​है। SDRF-NDRF पैदल ही मौके पर रवाना, हाईवे बंद है।

रुद्रप्रयाग त्रासदी: बादल फटा, पूरा गांव गायब

रुद्रप्रयाग में बादल फटने से तबाही। पहाड़ से आया सैलाब… छेनागाड़ गांव मलबे में तब्दील। बाजार, मछली तालाब, मुर्गी फार्म सब लील गया पानी। कई गांव प्रभावित, 8 लोग लापता। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में आसमान से मौत बरसी। बसुकेदार तहसील के छेनागाड़ गांव में बादल फटने से पूरा इलाका तबाह हो गया। जो गांव कभी खेती, मछली तालाब और छोटे बाजार की चहल-पहल से गुलजार था, वह अब मलबे का ढेर बन गया है।

बड़ेथ-बगडधार-तालजामनी: गदेरों का पानी और मलबा घरों तक घुसा। चमोली के मोपाटा गांव में एक दंपत्ति लापता, 15-20 मवेशी दबे। केदारनाथ घाटी के लावारा गांव में मोटर रोड ब्रिज बह गया। रुद्रप्रयाग एसपी अक्षय पप्रह्लाद कोंडे के मुताबिक “छेनागाड़ में 8 लोग लापता हैं, जिनमें 4 नेपाली मूल के हैं।” “केदारनाथ हाईवे अभी तक बंद है। SDRF की टीम पैदल मौके पर रवाना हो चुकी है।” “बांसवाड़ा में हाईवे बंद होने से रेस्क्यू में दिक्कतें, लेकिन वैकल्पिक मार्गों से राहत पहुंचाई जा रही है।”

नदी और धार्मिक स्थल भी प्रभावित

अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर है। रामकुंड डूब गया, हनुमान मंदिर जलमग्न। श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच बद्रीनाथ हाईवे डूबा। खेती, पशुपालन, मछली तालाब और मुर्गी फार्म से समृद्ध गांव। चहल-पहल भरा बाजार, चारधाम यात्रा से जुड़ा। लेकि अब मलबे का ढेर, बर्बाद खेत, टूटी सड़कें, बेघर लोग नजर आ रहे हैं। 28 अगस्त 2025 को आसमान से गिरी आफत ने पूरे छेनागाड़ और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल दी। यह त्रासदी बताती है कि हिमालयी इलाकों की नाजुक प्रकृति किस तरह हर बार मौसम की मार में तबाह हो रही है।

अधिकारियों का बयान सामने आया है। एसपी अक्षय पप्रह्लाद कोंडे का हवाला – हाईवे बंद, राहत कार्य जारी। ‘छेनागाड़ पहले कैसा था। शांतिपूर्ण गांव, खेती, दुकानें, तालाब-फार्म, स्कूल-मंदिर, चारधाम यात्रा का पड़ाव और अब पूरा दृश्य खंडहर शामिल है।। “जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा और मलबे का ढेर है।” “लोग अपनों को तलाश रहे हैं, लेकिन आंखों के सामने सिर्फ कीचड़ और टूटी दीवारें हैं।” “हिमालय की गोद में बसा छेनागाड़ अब एक त्रासदी की कहानी है… सवाल यही कि क्या पहाड़ ऐसे जख्मों से कभी उबर पाएंगे?

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