ट्रेड यूनियन की देशव्यापी हड़ताल का असर…बैंकिंग सेवा ठप.. बैंक शाखाओं में लटका ताला..ट्रेड यूनियन वाला…कामकाज बाधित

Impact of the nationwide strike by trade unions

ट्रेड यूनियन की देशव्यापी हड़ताल का असर…बैंकिंग सेवा ठप.. बैंक शाखाओं में लटका ताला..ट्रेड यूनियन वाला…कामकाज बाधित

आज बुधवार 9 जुलाई को देशभर में भारत बंद का ऐलान किया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगी संगठनों ने किया है। सरकार की कथित ‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक’ नीतियों के खिलाफ आज देशव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस हड़ताल से बैंकिंग के साथ डाक सेवाएं ही नहीं कोयला खनन, सरकारी कामकाज पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित नजर आ रहे हैं। आज ट्रेन लेट होने और बिजली आपूर्ति में बाधा की भी आमजन को परेशान करेगी।

हड़ताल के पीछे की प्रमुख वजह

ट्रेड यूनियंस की हड़ताल में किसानों की भागीदारी

किसान संगठनों और ग्रामीण मजदूर यूनियनों ने भी भारत बंद में समर्थन जताया है। कई जगहों पर सड़कें जाम, रैलियां और प्रदर्शन हो रहे हैं।

बैंकिंग सेवाएं हुई प्रभावित

भारत बंद का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में देखने को मिला। अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहा। कई जगहों पर एटीएम खाली मिले या सेवा बाधित नजर आ रही है। बैंक यूनियनों ने कहा कि सरकार के निजीकरण एजेंडे, श्रमिक अधिकारों में कटौती और वेतन असमानता के खिलाफ यह विरोध ज़रूरी था। कर्मचारी संगठनों ने चेताया कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो भविष्य में लंबी अवधि की हड़ताल की जाएगी।

परिवहन प्रणाली चरमराई

देश के विभिन्न हिस्सों में सड़क और रेल परिवहन पर बंद का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई राज्यों में सरकारी बसें नहीं चलीं, टैक्सी सेवाएं बाधित रहीं और ऑटो चालक भी बंद में शामिल हुए। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब में रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किए गए। यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने वैकल्पिक इंतज़ाम किए, परंतु कई रूटों पर यातायात पूरी तरह ठप रहा।

खनन और निर्माण भी बंद रहे

देश भर में कोयला, लोहा और अन्य खनिज क्षेत्रों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। ट्रेड यूनियनों ने दावा किया कि हजारों श्रमिक खदानों और निर्माण स्थलों पर काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रमुख निर्माण परियोजनाओं पर भी असर पड़ा, खासकर सरकारी अधोसंरचना योजनाओं में काम रुका। मजदूरों ने सुरक्षा, स्थायी रोजगार और मजदूरी बढ़ाने की मांग की। यूनियनों ने कहा कि श्रमिकों को लगातार नज़रअंदाज किया जा रहा है।

सरकार पर विपक्ष का वार

विपक्षी दलों ने भी इस बंद का समर्थन किया और सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी, आप और किसान संगठनों ने कहा कि यह सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में और आम जन के खिलाफ काम कर रही है। भारत बंद 2025 ने देशभर में श्रमिकों और किसानों की आवाज़ को मजबूती से उठाया। ट्रेड यूनियन नेताओं ने चेताया है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

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