देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) तकनीकी शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन, पब्लिक पॉलिसी और अन्य आधुनिक विषयों में नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं, जबकि छात्र संख्या भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस विस्तार के बीच एक गंभीर समस्या सामने आई है। देश के 23 आईआईटी में हजारों शिक्षकों के पद अब भी खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, स्वीकृत फैकल्टी पदों का बड़ा हिस्सा रिक्त होने से पढ़ाई, शोध कार्य और नए शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
देश के 23 आईआईटी में स्वीकृत पदों का करीब 38.4 प्रतिशत हिस्सा अब भी खाली पड़ा हुआ है
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश के सभी 23 आईआईटी में 12 हजार से अधिक स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 4,300 से ज्यादा पद अभी भी रिक्त हैं। इसका मतलब है कि कुल स्वीकृत पदों का लगभग 38.4 प्रतिशत हिस्सा भरा नहीं जा सका है। दूसरे शब्दों में कहें तो हर पांच में से लगभग दो शिक्षकों के पद खाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों की गुणवत्ता और विस्तार योजनाओं के लिए चुनौती बन सकती हैं।
आईआईटी पटना और खड़गपुर में सबसे ज्यादा रिक्तियां, कई प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थिति भी चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी पटना में सबसे अधिक 54.6 प्रतिशत फैकल्टी पद खाली हैं, जबकि आईआईटी खड़गपुर में 51.3 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसके अलावा कई अन्य संस्थानों में भी एक-तिहाई से ज्यादा पद भरे नहीं जा सके हैं। पहली पीढ़ी के प्रमुख संस्थानों में आईआईटी कानपुर (39%), आईआईटी बॉम्बे (38.4%) और आईआईटी दिल्ली (38.3%) भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी और तीसरी पीढ़ी के आईआईटी में आईआईटी मंडी (39.9%), आईआईटी धनबाद (48.4%), आईआईटी गोवा (45.8%) और आईआईटी गुवाहाटी (42.2%) में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। हालांकि आईआईटी धारवाड़ (1.7%), आईआईटी पलक्कड़ (5.88%), आईआईटी रोपड़ (14.35%), आईआईटी तिरुपति (14.38%) और आईआईटी भिलाई (15.1%) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है।
नई सीटें और नए कोर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी से भविष्य की योजनाओं पर बढ़ सकता है दबाव
सरकार वर्ष 2028-29 तक आईआईटी में करीब 6,500 नई सीटें जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही संस्थानों में लगातार नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। वर्तमान में देशभर के आईआईटी में 1.35 लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फैकल्टी की कमी दूर नहीं हुई तो शिक्षण गुणवत्ता, रिसर्च परियोजनाओं और नवाचार आधारित कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति भी उतनी ही आवश्यक मानी जा रही है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सख्त चयन प्रक्रिया के कारण समय पर नहीं भर पा रहे फैकल्टी पद
आईआईटी प्रशासन के अनुसार योग्य शिक्षकों की नियुक्ति आसान नहीं है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटियां, बहुराष्ट्रीय रिसर्च संस्थान और डीप-टेक कंपनियां प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं को बेहतर अवसर और आकर्षक पैकेज उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में कई योग्य पीएचडी उम्मीदवार अकादमिक संस्थानों की बजाय निजी या विदेशी संस्थानों का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा आईआईटी अपनी चयन प्रक्रिया में गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहते। इसी कारण उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने तक कई पद लंबे समय तक खाली रखे जा रहे हैं।





