तीन शादियाँ, तीन कहानियाँ — और एक चर्चित आईएएस अधिकारी की अनोखी दास्तान
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम फिर से चर्चा में है अवि प्रसाद। लेकिन इस बार वजह कोई बड़ा प्रशासनिक फैसला या विकास योजना नहीं, बल्कि उनकी निजी ज़िंदगी का नया अध्याय है। उनकी तीसरी शादी की खबर ने सोशल मीडिया से लेकर सियासी हलकों तक हलचल मचा दी है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी दोनों पूर्व पत्नियाँ भी भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS की अधिकारी हैं और वर्तमान में जिला कलेक्टर के पद पर तैनात हैं।
एक छोटे शहर से बड़ी उड़ान
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से ताल्लुक रखने वाले अवि प्रसाद बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। साधारण परिवार में पले-बढ़े अवि ने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने का जज़्बा भी रखा। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 13 हासिल की — जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। आईएएस बनने से पहले वे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) में कार्यरत थे। स्थिर और प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की राह चुनना उनके आत्मविश्वास और देशसेवा की भावना को दर्शाता है।
प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता का मेल
साल 2014 बैच के इस अधिकारी ने मध्य प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएँ शुरू कीं। अलग-अलग जिलों में कलेक्टर के रूप में काम करते हुए उन्होंने कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाया और जनसमस्याओं के समाधान में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया। कटनी जिले में उनके कार्यकाल को विशेष रूप से याद किया जाता है, जहाँ उन्होंने कुपोषण के खिलाफ सख्त कदम उठाए। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर कार्यरत हैं।
पहली शादी: एक समान सफर, अलग राहें
अवि प्रसाद की पहली शादी 2014 बैच की ही आईएएस अधिकारी Riju Bafna से हुई थी। दोनों की जोड़ी प्रशासनिक जगत में काफी चर्चित रही। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। आज रिजु बाफना मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले की कलेक्टर हैं और अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं।
दूसरी पारी: उम्मीदें और फिर विराम
पहले विवाह के बाद अवि प्रसाद ने 2016 बैच की आईएएस अधिकारी Misha Singh से विवाह किया। यह रिश्ता करीब चार साल तक चला। दोनों ही प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहे, लेकिन अंततः यह संबंध भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। मिशा सिंह वर्तमान में रतलाम जिले की कलेक्टर के रूप में कार्य कर रही हैं।
तीसरी शादी: सादगी में नई शुरुआत
11 फरवरी 2026 को अवि प्रसाद ने 2017 बैच की आईएएस अधिकारी Ankita Dhakre से विवाह किया। यह समारोह कुनो के एक होटल में बेहद निजी तौर पर आयोजित किया गया, जिसमें केवल परिवार के करीबी सदस्य शामिल हुए। अंकिता धाकरे अशोकनगर की रहने वाली हैं और वर्तमान में राज्य सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर पदस्थ हैं। उनके पिता, रविंद्र सिंह धाकरे, खाद्य विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अंकिता विभिन्न जिलों में एसडीएम के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे चुकी हैं।
एक आईएएस अधिकारी की तीन शादियाँ अपने आप में असामान्य नहीं कही जा सकतीं, क्योंकि विवाह पूरी तरह निजी निर्णय होता है। लेकिन जब तीनों ही जीवनसाथी उच्च प्रशासनिक पदों पर हों और दो पूर्व पत्नियाँ वर्तमान में कलेक्टर हों, तो यह खबर स्वाभाविक रूप से लोगों की जिज्ञासा का विषय बन जाती है। सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत मामला बताते हुए संयम बरतने की सलाह दी, तो कुछ ने इसे दिलचस्प संयोग बताया।
निजी जीवन बनाम सार्वजनिक पद
सार्वजनिक जीवन में रहने वाले अधिकारियों के लिए निजी जीवन को पूरी तरह निजी रखना आसान नहीं होता। अवि प्रसाद और अंकिता धाकरे — दोनों ने इस विवाह पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। दरअसल, प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों के जीवन में काम का दबाव, स्थानांतरण और जिम्मेदारियाँ बहुत अधिक होती हैं। ऐसे में व्यक्तिगत रिश्तों को संभालना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या कहती है यह कहानी?
यह कहानी केवल तीन शादियों की नहीं, बल्कि उन लोगों की है जो देश की प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और साथ ही अपनी व्यक्तिगत जिंदगी भी जीते हैं। सफलता, जिम्मेदारी और निजी फैसलों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। अवि प्रसाद का जीवन इस बात का उदाहरण है कि ऊँचाइयों तक पहुँचना जितना कठिन है, उतना ही चुनौतीपूर्ण है निजी जीवन में स्थिरता बनाए रखना। अंततः विवाह एक व्यक्तिगत निर्णय है। चाहे वह आम नागरिक का हो या किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का — उसका सम्मान होना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रशासनिक अधिकारी भी इंसान होते हैं, जिनके जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उनका हर कदम सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाता है। और शायद यही इस कहानी की सबसे रोचक बात है — एक सफल अधिकारी की पेशेवर उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी निजी जिंदगी भी समाज की उत्सुकता का केंद्र बन जाती है।





