केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) जल्द ही देश के सभी जिलों में मानव तस्करी रोधी यूनिट (एएचटीयू) खोलेगा। इसके अलावा सीमाई राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और वहां देश की सुरक्षा में लगे हुए सुरक्षाबलों जैसे बीएसएफ और एसएसबी को भी इसके लिए फंडिंग की जाएगी। डब्ल्यूसीडी मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मानव तस्करी रोधी यूनिट के जरिए बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों से नौकरी और अच्छे जीवन का झांसा देकर तस्करी के जरिए भारत पहुंचने वाली नाबालिग और युवा लड़कियों को मदद प्रदान करना है। इन यूनिटों में लड़कियों को सुरक्षित आश्रय के साथ खाना, कपड़े, परामर्श, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा और अन्य दैनिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
- देश में 788 मानव तस्करी रोधी यूनिट हैं
- सुरक्षा बलों द्वारा होता है संचालन
- अब प्रत्येक जिले में बनाएंगे यूनिट
- आश्रय स्थल भी बनेगा जहां सभी सुविधाएं मिलेंगी
- नौकरी के बहाने लड़कियों को फंसाते हैं तस्कर
पुनर्वास की होगी व्यवस्था
सूत्रों ने कहा कि इन नाबालिग लड़कियों को तस्करी के जरिए भारत के तमाम पड़ोसी देशों के जरिए सीमावर्ती राज्यों में लाया जाता है। यहां से मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली से इन्हें कमर्शियल सेक्स वर्क के लिए मध्य एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया भेज दिया जाता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार चाहती है कि देश के सीमा से लगे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मानव तस्करी रोधी यूनिट को ज्यादा सशक्त और सुविधा संपन्न बनाया जाना चाहिए। जिससे तस्करी के बाद यहां पहुंचने वाली लड़कियों को सुरक्षा के साथ पुनर्वास की व्यवस्था की जा सकेगी। आंकड़ों के हिसाब से देश में अभी 788 मानव तस्करी रोधी यूनिट मौजूद हैं। इनमें से 30 सीमाई राज्यों में हैं। जिनका संचालन बीएसएफ और एसएसबी जैसे सुरक्षाबलों द्वारा किया जा रहा है।