मानवाधिकार दिवस : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी एनएचआरसी के कार्यक्रम में शामिल
भारत में हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है, और इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) भारत में एक महत्वपूर्ण आयोजन करेगा। इस साल का कार्यक्रम भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय ‘हर दिन की आवश्यकताएँ: सार्वजनिक सेवाएं और सभी के लिए गरिमा’ रखा गया है। यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दिवस के इस साल के थीम से मेल खाता है।
डॉ. पी.के. मिश्रा का उद्घाटन भाषण
इस सम्मेलन में मुख्य भाषण प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा देंगे। वे इस विषय पर विचार करेंगे कि मानवाधिकार केवल एक आदर्श नहीं हैं, बल्कि ये हर नागरिक के जीवन की गुणवत्ता से जुड़े मूलभूत अधिकार हैं, जो हर व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, न्याय, वित्तीय समावेशन, और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं के माध्यम से सुनिश्चित किए जाते हैं।
एनएचआरसी की भूमिका
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जांच करता है और पीड़ितों के लिए राहत की सिफारिश करता है। एनएचआरसी के गठन के बाद से अब तक आयोग ने 23.8 लाख से अधिक मामले दर्ज किए हैं और 264 करोड़ रुपये की राहत की सिफारिश की है। आयोग का मानना है कि उत्तरदायी शासन और कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण प्रत्येक नागरिक को बुनियादी सुविधाओं, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की गारंटी प्रदान करने के लिए अनिवार्य हैं।
मानवाधिकार दिवस का महत्व
मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को हर साल मनाया जाता है, जो 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा (UDHR) को अपनाने की याद दिलाता है। यह दिन गरिमा, समानता और स्वतंत्रता के वैश्विक चार्टर के रूप में महत्वपूर्ण है, जो मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए दुनिया भर में मार्गदर्शन करता है। भारत का संविधान और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 भी इन्हीं सार्वभौमिक आदर्शों पर आधारित हैं।
‘हर दिन की आवश्यकताएँ’ का महत्व
इस वर्ष के मानवाधिकार दिवस का मुख्य विषय ‘हर दिन की आवश्यकताएँ’ है, जो बुनियादी आवश्यकताओं की बात करता है। एनएचआरसी ने इस विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता और सभी नागरिकों के लिए गरिमा सुनिश्चित करने पर चर्चा की जाएगी। यह सम्मेलन दो सत्रों में आयोजित होगा: ‘सभी के लिए बुनियादी सेवाएँ: मानवाधिकार दृष्टिकोण’ और ‘सार्वजनिक सेवाओं और गरिमा का संरक्षण’।
भारत की विकास यात्रा और मानवाधिकार
भारत में पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएँ लागू की गई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, और अवस्थापना जिलों कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार ने नागरिकों को बुनियादी सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, आयोग का मानना है कि इन योजनाओं को निरंतर सुधारने की आवश्यकता है ताकि सभी नागरिकों को इन सेवाओं का समान रूप से लाभ मिल सके।
एनएचआरसी के कार्य और प्रभाव
एनएचआरसी ने पिछले कई वर्षों में न केवल मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच की है, बल्कि इसने कानूनी और नीतिगत सुधार के लिए भी काम किया है। आयोग ने बच्चों के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, और श्रमिक कल्याण जैसे मुद्दों पर विभिन्न सिफारिशें की हैं। इसके अतिरिक्त, आयोग ने सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है और सार्वजनिक अधिकारियों और नागरिक समाज के बीच संवाद को बढ़ावा दिया है।
डिजिटल माध्यम से सार्वजनिक पहुंच
एनएचआरसी ने अपनी सेवाओं को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए डिजिटल नवाचार किया है। एचआरसी नेट पोर्टल को कार्यान्वित किया गया है, जिससे राज्य अधिकारियों के साथ जुड़कर लोग अपने शिकायतों की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। यह पोर्टल सात लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्रों और राष्ट्रीय सरकार सेवा पोर्टल से जुड़ा हुआ है, जिससे मानवाधिकारों की सुरक्षा और अधिकारों की प्राप्ति अधिक सुलभ और पारदर्शी हो गई है।
वैश्विक सहयोग और क्षमता निर्माण
एनएचआरसी, भारत ने मानवाधिकार सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए आईटीईसी-समर्थित क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। अब तक 78 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 23 देशों से 4 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा और विकास की दिशा में एनएचआरसी का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। 10 दिसंबर 2025 को आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा का उद्घाटन भाषण इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बना देगा। यह आयोजन न केवल मानवाधिकारों के प्रति हमारे समर्पण को दिखाता है, बल्कि यह हमें मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।