अमेरिका एक बार फिर बड़े राजनीतिक गतिरोध का शिकार हो गया है। छह साल बाद अमेरिकी सरकार को शटडाउन की स्थिति का सामना करना पड़ा है। इसका सीधा असर लाखों कर्मचारियों और आम जनता पर पड़ने जा रहा है। दरअसल, अमेरिकी सीनेट अस्थायी फंडिंग बिल को पारित कराने में नाकाम रही, जिसके कारण सरकारी खर्च पर रोक लग गई है। इस स्थिति ने अमेरिकी प्रशासन को ठप कर दिया है और कई गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं को बंद करना पड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर और सख्त रुख अपनाते हुए संघीय कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की चेतावनी दी है।
इस शटडाउन से हवाई यात्राओं में दिक्कत, आर्थिक रिपोर्ट्स में देरी और छोटे व्यवसायों के लिए मिलने वाले लोन पर असर पड़ेगा। लगभग 7.50 लाख संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजे जाने की संभावना जताई गई है, जिनमें से कुछ की नौकरी स्थायी तौर पर भी खतरे में पड़ सकती है। शटडाउन के दौरान केवल आवश्यक सेवाएं जैसे सेना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सोशल सिक्योरिटी ही चलती रहेंगी, जबकि नेशनल पार्क, लेबर डिपार्टमेंट और अन्य कई कार्यालय बंद हो गए हैं।
शटडाउन की शुरुआत कैसे हुई?
सीनेट में अस्थायी फंडिंग बिल पेश किया गया लेकिन 55-45 वोट से इसे खारिज कर दिया गया। हाउस की बैठक न होने और दोनों दलों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश न होने से हालात और बिगड़ गए। रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने कहा है कि सप्ताहांत में फिर से कोशिश की जा सकती है, मगर निकट भविष्य में गतिरोध टूटने की संभावना बेहद कम लग रही है।
किन सेवाओं पर होगा असर?
सरकारी फंडिंग बंद होते ही गैर-जरूरी सेवाएं ठप हो गई हैं। नेशनल पार्क्स बंद हो गए हैं, लेबर डिपार्टमेंट का ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स भी बंद कर दिया गया है। छोटे व्यवसायों को मिलने वाले लोन पर असर पड़ेगा और हवाई यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि सेना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सोशल सिक्योरिटी जैसी सेवाएं जारी रहेंगी।
कितने कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?
इस बार लगभग 7,50,000 संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने की तैयारी है। इनमें से लगभग 50,000 कर्मचारियों को तत्काल असर झेलना पड़ सकता है। कई कर्मचारियों की नौकरियां स्थायी रूप से खत्म होने की भी आशंका जताई जा रही है। इससे न केवल कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होगी बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा।
शटडाउन क्यों कहा जाता है?
अमेरिका में सरकार हर साल बजट पास करके ही चलती है। यदि सीनेट और हाउस में सहमति नहीं बनती और फंडिंग बिल पास नहीं होता तो सरकारी एजेंसियों को वेतन देने में दिक्कत आती है। ऐसे में नॉन-एसेंशियल दफ्तर और सेवाएं बंद कर दी जाती हैं, जिसे शटडाउन कहा जाता है। पिछले दो दशकों में यह पांचवीं बार है जब इतनी बड़ी स्थिति सामने आई है।





