देशभर के युवाओं के लिए स्वतंत्रता दिवस का दिन इस बार बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से अपने संबोधन में युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली ‘विकसित भारत रोजगार योजना’ की शुरुआत की। इस योजना के तहत प्राइवेट सेक्टर में पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को सरकार 15,000 रुपये की वित्तीय मदद देगी। मोदी ने कहा कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवाओं को मजबूत बनाने का बड़ा प्रयास है। 1 लाख करोड़ रुपये के बजट से शुरू हुई यह योजना आने वाले दो वर्षों में करोड़ों नौजवानों को रोजगार का अवसर देगी। खास बात यह है कि इसका लाभ केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि कंपनियों को भी मिलेगा ताकि वे ज्यादा से ज्यादा नियुक्तियां करें। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हों और करीब 2 करोड़ युवा पहली बार औपचारिक वर्कफोर्स से जुड़ें।
युवाओं के लिए सुनहरा मौका
विकसित भारत रोजगार योजना का सबसे बड़ा फायदा उन युवाओं को होगा जो पहली बार नौकरी पाने जा रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि जिनका EPFO में पहली बार पंजीकरण होगा, उन्हें अधिकतम 15,000 रुपये की सहायता मिलेगी। यह राशि दो किस्तों में सीधे खाते में जाएगी। इससे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें रोजगार बाजार में स्थिरता मिलेगी।
कंपनियों को भी मिलेगा प्रोत्साहन
यह योजना केवल नौकरीपेशा युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कंपनियों के लिए भी बड़ा फायदा रखा गया है। सरकार ने प्रावधान किया है कि जो कंपनियां नए रोजगार के अवसर पैदा करेंगी, उन्हें प्रति कर्मचारी 3,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दो वर्षों तक मिलेगी। खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस सुविधा को चौथे साल तक बढ़ाने का ऐलान किया है।
दो हिस्सों में बंटी योजना
इस योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है—पार्ट ‘ए’ और पार्ट ‘बी’। पार्ट ‘ए’ पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं पर केंद्रित है, जबकि पार्ट ‘B’ नियोक्ताओं के लिए बनाया गया है। सरकार चाहती है कि दोनों पक्षों को लाभ मिले और रोजगार का चक्र निरंतर चलता रहे। इससे युवाओं को स्थिर करियर मिलेगा और उद्योगों में भी नई ऊर्जा का संचार होगा।
बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य
श्रम मंत्रालय के मुताबिक, इस योजना के जरिए 2027 तक 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 1.92 करोड़ युवा ऐसे होंगे जो पहली बार रोजगार बाजार से जुड़ेंगे। इसके लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का फंड निर्धारित किया गया है। मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा।