प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में घुसपैठियों से निपटने के लिए मिशन डेमोग्राफी शुरू करेंगे। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से घुसपैठियों को लेकर चिंता जाहिर की। प्रधानमंत्री के मुताबिक घुसपैठिए देश के युवाओ का हक ले लेते है। ऐसे में घुसपैठियों से निपटने के लिए डेमोग्राफी मिशन शुरू किया जाएगा। आइए समझते है कि देश के राज्यों अवैध घुसपैठियों की समस्या कैसे विकराल होती जा रही है।
छोटे यूरोपिय देश की आबादी से ज्यादा है घुसपैठिए
सरकार समय समय पर घुसपैठियों को लेकर अपनी जानकारी अपडेट करती है और समाने लाती है। 2016 में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बताया था कि भारत में दो करोड़ बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे है जो आस्ट्रेलिया के पूरी आबादी के बराबर हैं। यूपीए सरकार में यही आकड़ा 1.2 करोड़ था। बड़ी बात ये है कि ये आंकड़ा केवल बांग्लादेश के घुसपैठियों का है। इसके अलावा म्यांमार, नेपाल और बाकी देशों से भी अवैध तरीके से लोग भारत आने वाले घुसपैठियों की आबादी अब और कई गुना बढ़ गई होगी।
सीमा से लगे राज्यों में सबसे ज्यादा घुसपैठ
देश में घुसपैठ सबसे ज्यादा उन राज्यों में है जिनकी सीमा किसी और देश से लगी है। इसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, असम जैसे राज्य है जहां भारी संख्या घुसपैठिए भारत आ जाते है और धीरे धीरे यहां बसने लग जाते हैं। अब ऐसे में अगर राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा ऐसे लोग है जो बिना किसी वैध दस्तावेज के यहां रह रहे हैं। ऐसे लोगो की संख्या 56-57 लाख तक बताई गई है। दूसरे नंबर पर असम है जहां अवैध घुसपैठियों की संख्या 50 लाख से ज्यादा है। जब असम में NRC अभियान चलाया गया तो तकरीबन 19 लाख लोग बाहर हो गए। और उनकी नागरिकता सवालों के घेरे में आ गई।
अब तक कई घुसपैठियों को किया है बाहर
सरकार लगातार घुसपैठ को लेकर कानूनी करावाई करती रही है।2011 से लेकर 2017 तक सात साल के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक हर साल देश से वापस भेजे गए बांग्लादेशी
2011 में 6761 बांग्लादेशियों को भारत से वापस भेजा गया
• 2012 में 6537 बांग्लादेशी भारत से वापस भेजे गए
• 2013 में 5234 लोगों को वापस उनके देश भेज दिया गया
• 2014 में कुल 989 लोग बांग्लादेश वापस भेजे गए
• 2015 में 474 लोगों को वापस भेजा गया
• साल 2016 में 308 और 2017 में 51 लोग बांग्लादेश भेजे गए
घुसपैठियों का बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। इसके चलते सीमावर्ती राज्यों में डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। इसलिए इस खतरे से निपटने के लिए डेमोग्राफी मिशन जल्दी हीशुरू किया जाएगा।