तेलंगाना की राजनीति में नई करवट: KCR ने कविता को पार्टी से निकाला, कमान KTR के हाथों में

तेलंगाना से विधान परिषद के कविता को पार्टी से निकाला दे दिया । के कविता को उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति से निकाल दिया है। उन पर ये एक्शन पार्टी के सर्वेसर्वा और तेलंगाना के पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) ने लिया। KCR के इस फैसले के साथ ही ये भी तय हो गया कि अब भारत राष्ट्र समिति मतलब की बीआरएस (BRS Party) के राजनैतिक उत्तराधिकारी उनके बेटे K. T. Rama Rao पार्टी के उत्तराधिकारी होंगे।

परिवार में वर्चस्व केवल बेटों का
आमतौर देश के सामाजिक ताने बाने में हमेशा बेटों को ही उत्तराधिकारी माना जाता है । ऐसा ही धारणा राजनैतिक परिवारों में देखी जाती है। कई राजनैतिक घऱानों में परिवार में बेटियों की बजाए बेटों को पार्टी की कमान सौंप दी जाती है। ये कहानी उत्तर से लेकर दक्षिण तक देखी जा रही है।
तेलंगाना में BRS Party की कमान अब KCR के बेटे K. T. Rama Rao सम्हालेंगे। के कविता को पार्टी से निकाला दे दिया है।

इससे पहले आंध्र प्रदेश में वाई. एस. राजशेखर रेड्डी की बेटी वाई. एस. शर्मिला को भी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना पडा। YSR के बेटे जगन रेड्डी पार्टी के इकलौते उत्तराधिकारी बने। नार्थ ईस्ट की बात करें तो मेघालय में अगाथा संगमा पीए संगमा की बेटी है। लेकिन उनकी पार्टी बेटे कॉनराड संगमा ने सम्हाल ऱखी है उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी और सीएम पद दोनो की ही जिम्मेदारी सम्हाल रखी है। अगाथा तुरा लोकसभा क्षेत्र की सांसद हैं।
इसके अलावा उत्तर में

बिहार के सबसे बड़े राजनैतिक घराने में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पार्टी की कमान उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सौंपी गई है। जबकि तेजस्वी से लगभग 13-14 साल बड़ी मीसा भारती उनसे पहले से ही राजनीति में है साथ ही लालू प्रसाद यादव और राबडी देवी के साथ पार्टी के दिशा और दशा के लिए काम करती आ रही है।

सबसे बड़ी बात ये कि देश के सबसे पुराने राजनैतिक घराने में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। गांधी परिवार से प्रियंका गांधी सालों से कांग्रेस में महासचिव पद पर है औऱ पार्टी के ज्यादातर कामों में बढ चढकर हिस्सा लेती है। लेकिन उनको भी चुनावी राजनीति में सक्रिय होने औऱ जनता के बीच आने में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा । जब तक उनके भाई राहुल गांधी ने अपना एक राजनैतिक मुकाम हासिल नहीं कर लिया।

कुछ घरानों में अपवाद के तौर पर बेटिया सर्वेसर्वा हैं। लेकिन उन घरों में इन बेटियों के सगे भाई नहीं है । साथ ही इससे परिवार में फूट भी देखने को मिली। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का है। NCP प्रमुख शरद पंवार ने अपनी बेटी को पार्टी की कमान सौंपी तो भतीजे ने नाराज होकर पार्टी में दो फाड़ कर दिए। जिससे परिवार और पार्टी दोनो में ही फूट हो गई ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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