सीएम हाउस के बाहर जदयू विधायक का धरना, टिकट को लेकर खुला बगावती मोर्चा
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे एनडीए (NDA) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर असंतोष भी बढ़ता जा रहा है। पटना में मंगलवार को जदयू के चर्चित विधायक गोपाल मंडल ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर गमछा बिछाकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। गोपालपुर सीट से विधायक मंडल ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ लोग उन्हें टिकट से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने जदयू और एनडीए, दोनों के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
सीएम से मिलने पहुंचे, लेकिन गेट पर रोक दिए गए
जानकारी के मुताबिक, विधायक गोपाल मंडल मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने सीएम हाउस पहुंचे थे। लेकिन वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। इससे नाराज होकर मंडल वहीं सड़क पर गमछा बिछाकर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरी बात मुख्यमंत्री से सीधे होनी चाहिए, बीच में बैठे कुछ लोग टिकट नहीं देना चाहते।” इस दौरान उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और “गोपाल मंडल ज़िंदाबाद” के नारे लगाए।
जदयू में बढ़ती अंदरूनी नाराजगी
गोपाल मंडल के इस धरने ने जदयू के भीतर चल रही असहमति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विधायक ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अपने क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने के लिए अन्य विधायकों को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पार्टी छोड़ने के मूड में नहीं हैं, लेकिन अगर उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई तो वे खुलकर विरोध करेंगे। मंडल पहले भी कई बार अपने बयानों और बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में रहे हैं।
NDA में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान
एनडीए गठबंधन में इस समय सीटों को लेकर बड़ा घमासान मचा हुआ है। जदयू और बीजेपी के बीच कई विधानसभा क्षेत्रों पर सहमति नहीं बन पाई है, वहीं एलजेपी (रामविलास) भी अपने हिस्से को लेकर दबाव बना रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटों पर तीनों दलों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। ऐसे में गोपाल मंडल का धरना एनडीए के भीतर के तनाव को और गहरा करता दिख रहा है।
चुनावी माहौल में बढ़ा राजनीतिक तनाव
बिहार की राजनीति इस समय बेहद गर्म है। चुनावी समीकरण लगातार बदल रहे हैं और टिकट बंटवारे से पहले नेताओं की नाराजगी खुले में आ रही है। गोपाल मंडल का धरना न सिर्फ जदयू के भीतर असंतोष का प्रतीक है, बल्कि यह एनडीए के लिए भी चेतावनी है कि अगर मतभेद समय पर नहीं सुलझाए गए, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।