संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबिआंतो का भाषण वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश के नेता ने अपने संबोधन में न केवल इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर शांति की अपील की बल्कि गाज़ा में स्थिरता लाने के लिए इंडोनेशिया की ओर से 20,000 सैनिकों को भेजने की तैयारी भी जताई। राष्ट्रपति सुबिआंतो ने अपने लगभग 19 मिनट लंबे भाषण में मानवता, समानता और न्याय का संदेश दिया और अंत में सभी धर्मों के प्रतीकों के रूप में “ॐ शांति शांति शांति ॐ”, “नमो बुद्धाय” और “शालोम” कहकर पूरी दुनिया को सद्भाव का संदेश भेजा। इस अनोखे अंदाज़ ने UNGA के मंच पर मौजूद प्रतिनिधियों को चौंकाया और प्रेरित भी किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुनिया में बढ़ती हिंसा, नफरत और रंगभेद हमारे साझा भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इंडोनेशिया, जो पहले से ही संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक है, अब गाज़ा में शांति बहाली के लिए सीधे ज़मीनी स्तर पर मदद देने की इच्छा ज़ाहिर कर रहा है। गौरतलब है कि इंडोनेशिया की आबादी 28 करोड़ से अधिक है, जिसमें लगभग 90% लोग इस्लाम धर्म का पालन करते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का यह संदेश वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल पेश करता है।
गाज़ा संकट पर इंडोनेशिया का बड़ा कदम
राष्ट्रपति सुबिआंतो ने स्पष्ट किया कि उनका देश गाज़ा में शांति स्थापित करने के लिए 20,000 सैनिक तैनात करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया केवल भाषणों और वादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर शांति सुनिश्चित करने में योगदान देगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब गाज़ा में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
राजनीतिक विवाद का हल हिंसा नहीं
अपने संबोधन में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राजनीतिक संघर्ष का समाधान हिंसा से नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हिंसा हमेशा और अधिक हिंसा को जन्म देती है। इसके बजाय, उन्होंने द्वि-राष्ट्र समाधान को सबसे उचित रास्ता बताया, जिसमें फिलिस्तीन और इजरायल दोनों को स्वतंत्र, सुरक्षित और आतंकवाद से मुक्त वातावरण मिल सके। यह बयान UNGA के मंच से शांति की दिशा में एक ठोस सुझाव माना जा रहा है।
ॐ शांति ॐ’ से गूंजी UNGA की सभा
भाषण के अंत में प्रोबोवो सुबिआंतो ने वैश्विक दर्शकों को चौंका दिया, जब उन्होंने हिंदू, बौद्ध और यहूदी धर्मों से जुड़े शब्दों का प्रयोग कर संदेश दिया। उन्होंने कहा—“ॐ शांति शांति शांति ॐ”, “नमो बुद्धाय” और “शालोम”। इस बहुसांस्कृतिक संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि इंडोनेशिया केवल मुस्लिम दुनिया का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और सद्भाव का संदेश देने वाला देश है।
दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश का नेतृत्व
इंडोनेशिया आज दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है, जिसकी जनसंख्या 28 करोड़ से अधिक है। इसमें करीब 90% लोग इस्लाम को मानते हैं। ऐसे देश के राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न धर्मों की वाणी को शामिल कर ‘वैश्विक शांति’ का आह्वान करना न केवल कूटनीतिक दृष्टि से अहम है बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि धर्म और संस्कृति की विविधता संघर्ष का कारण नहीं, बल्कि समाधान की राह हो सकती है।