संसद का मॉनसून सत्र खत्म हो गया। लेकिन सत्र ख्तम होने के साथ ही एक बार फिर इंडिया गठबंधन की फूट खुलकर सामने आ गई। इंडिया गठबंधन में अब संविधान के 130 संशोधन को लेकर मतभेज दिखाई दे रहे है। इंडिया गठबंधन के दल इस विधेयक का विरोध तो कर रहे हैं लेकिन इनमें से कुछ इससे जुड़ी संसदीय समिति का हिस्सा नहीं बनना चाहते है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी Chief Minister Mamata Banerjee ने इस बिल की पार्लियामेंट्री कमेटी का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया है। टीएमसी ने कहा है कि वह अपने सदस्यों को जेपीसी के लिए नामित नहीं करेगी क्योंकि जेपीसी सिर्फ एक तमाशा है।
बिल पेश होते ही मचा था हंगामा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह Union Home Minister Amit Shah को जैसे ही सदन के पटल पर रखा सदन मे जोर जोर से हंगामा होने लगा। विपक्षी दलों के हंगामे के बीच अमित शाह ने बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में भेजे जाने का प्रस्ताव भी रख दिया । इस प्रस्ताव को स्पीकर ने मंजूरी भी दे दी। इस बिल के लिए संयुक्त संसदीय समिती बनाई जाएगी जिसमें सभी दलों के सांसद होंगे और नए कानून पर अपने विचार रखेंगे और सभी पहलूओं पर विचार भी किया जाएगा। सरकार ने विधेयक के लिए कमेटी बना दी है लेकिन इंडिया गठबंधन के दलों में इसे लेकर ही मतभेद दिखाई दे रहा है। सभी दल कमेटी के लिए अपने अपने सांसदों का नाम दे रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस का अलग ही राग है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममचा बेनर्जी ने इस पर अलग रूख अख्तियार कर लिया है वो अपनी पार्टी को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में नहीं भेजना चाहती। पार्टी का मानना है कि जेपीसी का गठन केवल एक तमाशा है।
मायावती भी जता चुकी है असहमति
बसपा सुप्रीमो मायावती भी संविधान के 130 संशोधन से अपनी असहमति जता चुकी है। उनका कहना है कि इस संशोधन के लिए सरकार को एक बार फिर विचार करना होगा क्योंकि इसका दुरूपयोग सत्ताधारी दल अपने राजनैतिक फायदे के लिए कर सकता है। मायावती ने सोशल मीडिया पर एक्स पर बिल के बारे में अपनी असहमति जताई और कहा कि सरकार को इस विधेयक के बारे में एक बार फिर विचार करना चाहिए।
बिल के खिलाफ खुलकर बोली प्रियंका गांधी
बिल जिस दिन सदन के पटल पर रखा गया था कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इसका खुलकर विरोध किया। प्रियंका गांधी Priyanka Gandhi का भी मानना है कि ये बिल राजनैतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। सदन में बिल पेश होने के बाद काफी देर तक हंगामा रहा। हंगामे के ही बीच में बिल के लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी का प्रस्ताव सरकारी की ओर से रखा गया जिसे स्पीकर ने मंजूर कर लिया। इसके बाद संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया।
क्या है बिल का मसौदा
सदन के पटल पर संविधन के 130 संशोधन के तौर पर इस बिल को रखा गया था। इस बिल में मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की गिरफ्तारी के संबंध में कानून बनाने की मसौदा है। इसके तहत अगर किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री , प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री किसी आपराधिक प्रकरण में जेल जाते हैं। ऐसे में वो लगातार 30 दिन न्यायिक हिरासत में रहते हैं तो उनको 31 दिन उनको इस्तीफा देना होगा। अगर वो 31 दिन इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनको बर्खास्त किया जा सकता है।