भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बूम देखने को मिला है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों में EV चार्जिंग स्टेशनों की संख्या चार गुना बढ़ चुकी है। खास बात यह है कि अब 91% राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर की दूरी पर एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन मौजूद है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की खपत और पेट्रोल पंपों के भविष्य पर पड़ सकता है। यह ट्रेंड बताता है कि आने वाले समय में EV भारत की ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में बड़ा गेमचेंजर साबित होंगे।
15 महीनों में 18,000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन
टाटा मोटर्स की EV रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ने 2023 से 2025 के बीच जबरदस्त छलांग लगाई है। महज 15 महीनों में देशभर में 18,000 से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग स्टेशन जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 5,500 से बढ़कर 23,000 से ऊपर पहुंच गई। यह वृद्धि सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है।
हाईवे पर 100% कवरेज की ओर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के 91% नेशनल हाइवेज पर हर 50 किलोमीटर की दूरी पर अब फास्ट चार्जिंग स्टेशन मौजूद है। वहीं, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों ने अपने सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर 100% कवरेज हासिल कर ली है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले EV उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
बदलती उपभोक्ता आदतें
EV चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार ने उपभोक्ताओं की आदतों में भी बदलाव किया है। 2023 की तुलना में 2025 में अब 35% EV उपभोक्ता महीने में कम से कम एक बार फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, आधे से ज्यादा यूजर्स 500 किलोमीटर से अधिक की यात्राएं पूरी कर रहे हैं, जिससे EVs के प्रति भरोसा और भी मजबूत हुआ है।
EV की बढ़ती पकड़
रिपोर्ट में बताया गया है कि अब देश के 65% पिन कोड में कम से कम एक रजिस्टर्ड EV मौजूद है। इतना ही नहीं, 84% EV यूजर्स ने इन्हें अपना प्राथमिक वाहन मानना शुरू कर दिया है। यह आंकड़ा 2023 में 74% था। यह ट्रेंड साफ करता है कि भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की पकड़ मजबूत होती जा रही है और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की निर्भरता काफी कम हो सकती है।