पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ीं, हिमाचल में अब तक 35 बार तबाही
देश के पहाड़ी राज्य इन दिनों नई मुसीबत में हैं। दरअसल यहां बादल फटने की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं। अकेले हिमाचल प्रदेश में इस साल अब तक करीब 35 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जो पिछले साल के आंकड़े 27 से कहीं ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक निर्माण इसके मुख्य कारण हैं।
मंडी जिला सबसे प्रभावित
इस साल 35 घटनाओं में से 19 अकेले मंडी जिले में हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह आंकड़ा 30 जून से अब तक का है और बरसात के लंबा रहने के कयास के कारण संख्या और बढ़ सकती है।
बादल फटने का पैमाना
विशेषज्ञ बताते हैं कि बादल फटने की घटना का कोई सटीक पैमाना नहीं है। आमतौर पर 100 मिलीमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक बारिश को बादल फटना माना जाता है। इसके अलावा भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन जाने को भी बादल फटने की श्रेणी में रखा जाता है।
क्यों बढ़ रही हैं आपदाएं
पहाड़ी राज्यों में पहले भी बरसात होती थी, लेकिन इतनी तबाही नहीं होती थी। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक निर्माण जैसे खनन, अवैज्ञानिक ढांचे और निर्माण कार्य इन आपदाओं को बढ़ा रहे हैं।
आपदा प्रबंधन की तैयारी
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्रीय टीम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इस रिपोर्ट के बाद आपदा निवारण और चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी बनाने की तैयारी की जाएगी।
प्रकाश कुमार पांडेय