Bihar Elections 2025: NDA की सरकार बनने के आसार, फलोदी सट्टा बाजार ने फिर मचाई हलचल!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे बस कुछ घंटों की दूरी पर हैं। 14 नवंबर को जैसे ही मतगणना शुरू होगी, पूरे देश की निगाहें बिहार पर टिक जाएंगी। इस बीच राजस्थान के मशहूर फलोदी सट्टा बाजार ने अपने अनुमान जारी कर दिए हैं, जिन्होंने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। बाजार के ताज़ा रुझानों के अनुसार, NDA इस बार एक बार फिर सत्ता में वापसी करता दिख रहा है, जबकि महागठबंधन पिछड़ता नज़र आ रहा है।

NDA को स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन पिछड़ा

राजस्थान के जोधपुर ज़िले में स्थित यह बाजार कई दशकों से राजनीतिक भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है। ताज़ा अनुमानों के मुताबिक, इस बार NDA को 145 से 148 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन को 86 से 89 सीटों पर सिमटने का अनुमान है। आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी को 70–72, जेडीयू को 57–59, राजद को 66–68, कांग्रेस को लगभग 13 और अन्य दलों को 5–10 सीटें मिल सकती हैं। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के खाते में कोई सीट आने की उम्मीद नहीं है।

क्यों NDA के पक्ष में झुक रहा है रुझान?

फलोदी सट्टा बाजार के जानकारों का कहना है कि इस बार नीतीश कुमार की पकड़ ज़मीनी स्तर पर मजबूत दिख रही है। बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारा सुचारू रहा, जिससे गठबंधन में एकजुटता बनी रही। महिलाओं और ग्रामीण वोटरों के बीच नीतीश की लोकप्रियता भी NDA के पक्ष में जाती दिख रही है। दूसरी ओर, महागठबंधन के अंदर तालमेल की कमी और स्थानीय उम्मीदवारों की कमजोरी उसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

NDA को एग्जिट पोल्स में भी बढ़त

फलोदी सट्टा बाजार के अनुमान से पहले आए पोल ऑफ पोल्स भी NDA को स्पष्ट बढ़त दे रहे हैं। 18 एजेंसियों के संयुक्त आकलन के अनुसार, 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA को करीब 153 सीटें और महागठबंधन को लगभग 85 सीटें मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि NDA को पिछली बार की तुलना में लगभग 29 सीटों का फायदा हो सकता है, जबकि महागठबंधन को 27 सीटों का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

क्या है फलोदी सट्टा बाजार और कैसे तय होते हैं भाव?

राजस्थान के छोटे कस्बे फलोदी में दशकों से चल रहा यह सट्टा बाजार राजनीतिक भविष्यवाणियों के लिए मशहूर है। यहां “भाव” यानी रेट्स, लोगों की उम्मीदों और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित होते हैं। जिस पार्टी के पक्ष में अधिक भरोसा होता है, उसके रेट नीचे रहते हैं। कई बार इस बाजार के अनुमान चुनावी नतीजों से मेल खाते रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार भी फलोदी का अनुमान कितना सटीक साबित होता है।

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