Bhai Dooj 2025: इस साल 3 शुभ योग में मनाया जाएगा भाई दूज, बहनों को मिलेगा 2 घंटे 15 मिनट का तिलक मुहूर्त — जानें तिथि, महत्व और कथा

प्रेम और आशीर्वाद का पर्व: भाई दूज आज
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व ‘भाई दूज’ आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दिवाली के पांचवें दिन आने वाला यह त्यौहार पारिवारिक प्रेम और सुरक्षा के बंधन को और मजबूत बनाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी दीर्घायु और समृद्धि की कामना करती है, वहीं भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके प्रति स्नेह और सुरक्षा का वचन देता है। इस वर्ष भाई दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को है, जब तीन शुभ योग — आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग — एक साथ बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

तीन शुभ योगों का संगम, बढ़ेगा त्योहार का शुभ प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार भाई दूज पर तीन विशेष योगों का संयोग बना है। आयुष्मान योग सुबह से लेकर अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को तड़के 5 बजे तक रहेगा। इसे दीर्घायु और शुभ फल देने वाला योग माना गया है। इसके अलावा, द्वितीया तिथि में सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग भी रहेगा, जो 24 अक्टूबर की सुबह 4:51 बजे से 6:28 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान किए गए सभी शुभ कार्यों का विशेष फल मिलता है। यही कारण है कि इस बार भाई दूज का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है।

तिलक का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
पंचांग के मुताबिक, भाई दूज की द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन का तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 बजे तक रहेगा — यानी 2 घंटे 15 मिनट तक बहनें अपने भाइयों का तिलक कर सकती हैं। इस दौरान तिलक लगाने, आरती उतारने और भोजन कराने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही दिन का अभिजीत मुहूर्त 11:43 से 12:28 तक रहेगा और शाम को अमृत काल 6:57 से 8:45 बजे तक रहेगा। ये सभी समय धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माने गए हैं।

यम और यमुना की कथा से जुड़ी पौराणिक मान्यता
भाई दूज का संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी एक पौराणिक कथा से है। कहा जाता है कि एक बार यमराज अपनी बहन यमुना के घर कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन पहुंचे। यमुना ने बड़े प्रेम से उनका स्वागत किया, उन्हें तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया। इस पर प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज का पर्व यम द्वितीया के रूप में प्रसिद्ध हुआ और यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।

भाई-बहन के रिश्ते का अटूट बंधन
भाई दूज न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि भावनाओं का ऐसा बंधन है जो रिश्तों को मजबूत करता है। यह दिन बहनों के लिए अपने भाई की खुशहाली की कामना का और भाइयों के लिए अपनी बहन के प्रति प्रेम और सुरक्षा के वचन का प्रतीक बन गया है। इस पर्व के माध्यम से परिवारों में स्नेह, अपनापन और एकजुटता की भावना और प्रबल होती है। आज के दिन हर घर में प्रेम, उपहारों और मिठास का वातावरण देखने को मिलता है।

 

 

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