जैसे-जैसे जनवरी का महीना आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आम लोगों में यूनियन बजट को लेकर उत्सुकता भी तेज होती जा रही है। इस साल भी केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट पेश करने जा रही है। सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी से होगी, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगी। इसके बाद 29 जनवरी को आर्थिक सर्वे पेश किया जाएगा, जो देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति की तस्वीर पेश करेगा। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट भाषण देंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजट बनने में कितनी मेहनत और समय लगता है? आइए पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं।
चार महीने पहले शुरू हो जाती है तैयारी
आम बजट तैयार करने की प्रक्रिया बजट पेश होने से करीब चार महीने पहले ही शुरू हो जाती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के बजट डिवीजन पर होती है। यह विभाग सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों से अगले वित्त वर्ष की जरूरतों और योजनाओं का ब्योरा मांगता है। इसके बाद इन मांगों की गहराई से जांच की जाती है और देखा जाता है कि किस सेक्टर को कितनी फंडिंग की जरूरत है।
मंत्रालयों की मांग पर होता है मंथन
हर मंत्रालय अपनी योजनाओं, परियोजनाओं और खर्च का पूरा खाका सरकार को सौंपता है। इसके बाद बजट डिवीजन इन सभी प्रस्तावों की समीक्षा करता है। सरकार यह तय करती है कि किस मंत्रालय को कितना बजट दिया जाएगा। इस दौरान सरकार देश की आर्थिक स्थिति, टैक्स कलेक्शन और खर्च की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखती है, ताकि संतुलित बजट तैयार किया जा सके।
जनता और उद्योगों से भी ली जाती है राय
बजट बनाने से पहले सरकार केवल मंत्रालयों पर निर्भर नहीं रहती। आम जनता, उद्योग जगत, अर्थशास्त्रियों, ट्रेड यूनियन, किसान संगठनों और विभिन्न सेक्टर के विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाते हैं। देश के बड़े उद्योग संगठनों की ओर से भी सरकार को उम्मीदों की लिस्ट भेजी जाती है। इन सभी सुझावों और मांगों की समीक्षा की जाती है, ताकि बजट जनहित और विकास दोनों को ध्यान में रखकर तैयार हो सके।
पीएम की मंजूरी के बाद फाइनल होता है बजट
जब पूरी बजट रूपरेखा तैयार हो जाती है, तो वित्त मंत्री इसकी जानकारी प्रधानमंत्री को देती हैं। प्रधानमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद बजट को अंतिम रूप दिया जाता है। इस बार 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि उसी दिन बजट पेश किया जाएगा। इससे पहले लोगों में संशय था कि तारीख बदली जा सकती है, लेकिन सरकार ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।