ट्रंप ने कैसे मॉनिटर किया “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी”…जानें क्या है ये ऑपरेशन…मारे गए अमेरिकी सैनिकों को बताया सच्चा अमेरिकी देशभक्त

Operation Epic Fury

ट्रंप ने कैसे मॉनिटर किया “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी”

अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए संयुक्त सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान राष्ट्रपति Donald Trump की निगरानी की तस्वीरें सामने आई हैं। व्हाइट हाउस के आधिकारिक एक्स पूर्व ट्विटर अकाउंट पर साझा की गई इन तस्वीरों में ट्रंप एक विशेष कमरे में सैन्य कार्रवाई की प्रगति पर नजर रखते दिखाई दे रहे हैं। कमरे की पहचान उसकी लकड़ी की छत की बीम और काले पर्दों से हो रही है, जो इसे एक सुरक्षित और गोपनीय कमांड सेंटर जैसा स्वरूप देती है।

पोस्ट में लिखा गया, “President Donald J. Trump Monitors U.S. Military Operations in Iran: Operation Epic Fury, February 28, 2026.” उस समय ट्रंप फ्लोरिडा में मौजूद थे, जहां से वे लगातार ऑपरेशन से जुड़ी अपडेट ले रहे थे। एक तस्वीर में वे अपनी करीबी सहयोगी Susie Wiles से चर्चा करते भी नजर आए।

36 घंटों में सबसे बड़ा सैन्य अभियान

ट्रंप ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले 36 घंटों के भीतर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत दुनिया के सबसे बड़े, जटिल और व्यापक सैन्य अभियानों में से एक को अंजाम दिया। उनके अनुसार, ईरान में सैकड़ों लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जिनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकाने, वायु रक्षा प्रणाली और नौसैनिक ढांचे शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ ही मिनटों में नौ जहाजों और उनके निर्माण केंद्र को तबाह कर दिया गया। यह कार्रवाई अत्यंत सटीक और तेज गति से की गई, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर झटका लगा।

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei इस हमले में मारे गए। उन्होंने उन्हें “क्रूर और हिंसक व्यक्ति” बताते हुए कहा कि उनके हाथों पर सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों और हजारों निर्दोष लोगों का खून था। ट्रंप के मुताबिक, जैसे ही उनकी मौत की घोषणा हुई, ईरान के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए और जश्न मनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इसे ईरानी शासन के लिए निर्णायक झटका बता रहा है।

सैन्य कमांड ढांचा ध्वस्त

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की पूरी सैन्य कमांड संरचना लगभग समाप्त हो चुकी है। कई वरिष्ठ अधिकारी आत्मसमर्पण करना चाहते हैं और अपनी जान बचाने के लिए प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हजारों की संख्या में कॉल आ रहे हैं, जिनमें अधिकारी हथियार डालने की इच्छा जता रहे हैं। इसके बावजूद, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सैन्य अभियान अभी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिका अपने सभी रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल नहीं कर लेता।

अमेरिकी सैनिकों की शहादत

इस अभियान के दौरान तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि भी की गई। ट्रंप ने उन्हें “सच्चा अमेरिकी देशभक्त” बताते हुए राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि दी। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।उन्होंने स्वीकार किया कि अभियान समाप्त होने से पहले और भी नुकसान हो सकता है, लेकिन अमेरिका हर संभव प्रयास करेगा कि हताहतों की संख्या कम से कम रहे।

परमाणु खतरे का हवाला

ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस ईरानी शासन अमेरिका और दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। उनका कहना था कि आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने वाला कोई भी देश यदि परमाणु शक्ति हासिल कर ले, तो वह पूरी दुनिया को ब्लैकमेल कर सकता है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ऐसा होने नहीं देगा। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और उसका इस्तेमाल अब “अच्छे उद्देश्य” के लिए किया जा रहा है।

इज़राइल के साथ मजबूत गठजोड़

ट्रंप ने कहा कि इस अभियान में अमेरिका और Israel का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। दोनों देशों का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण देना है। उन्होंने इसे “एक स्वतंत्र राष्ट्र का कर्तव्य और बोझ” बताया, जो अपने नागरिकों को कट्टरपंथी और परमाणु हथियारों से लैस शासन के खतरे से बचाने के लिए उठाया गया कदम है। ट्रंप ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और सैन्य पुलिस से हथियार डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं तो उन्हें पूर्ण प्रतिरक्षा दी जा सकती है, अन्यथा उन्हें निश्चित मौत का सामना करना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने ईरानी नागरिकों से भी “स्वतंत्रता के इस क्षण” का लाभ उठाने और अपने देश को वापस लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है और सहायता के लिए तैयार है।

“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को ट्रंप प्रशासन एक निर्णायक और ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। तस्वीरों में दिखाई गई निगरानी और उनके सख्त बयान इस बात का संकेत देते हैं कि अमेरिका इस अभियान को केवल सामरिक नहीं, बल्कि वैचारिक लड़ाई के रूप में भी देख रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान को लेकर बहस तेज हो सकती है, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के नाम पर कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

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