राज्यसभा जाने पर नीतीश कुमार की सैलरी कितनी होगी? मुख्यमंत्री से ज्यादा या कम – समझिए पूरा गणित

Nitish Kumar salary

राज्यसभा जाने पर नीतीश कुमार की सैलरी कितनी होगी? मुख्यमंत्री से ज्यादा या कम – समझिए पूरा गणित

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा की और राज्यसभा के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया। राज्यसभा के सदस्य बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मुख्यमंत्री के पद से हटकर सांसद बनने पर उनकी सैलरी कितनी होगी और क्या यह मुख्यमंत्री की सैलरी से ज्यादा होगी या कम।

दरअसल, मुख्यमंत्री और सांसद दोनों ही संवैधानिक पद हैं, लेकिन इनके वेतन और सुविधाओं की व्यवस्था अलग-अलग होती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाली सैलरी और सुविधाओं में कितना अंतर है।

सांसद को कितनी मिलती है सैलरी?

भारत में सांसदों की सैलरी संसद द्वारा तय की जाती है। वर्तमान वेतन ढांचे के अनुसार किसी भी सांसद को लगभग 1 लाख रुपये मासिक मूल वेतन मिलता है। हालांकि यह केवल बेसिक सैलरी होती है। इसके अलावा कई तरह के भत्ते और सुविधाएं भी सांसदों को मिलती हैं।

सांसदों को संसद सत्र या किसी आधिकारिक बैठक में शामिल होने पर प्रतिदिन 2,500 रुपये का दैनिक भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा कार्यालय खर्च के लिए हर महीने लगभग 75 हजार रुपये मिलते हैं। सांसदों को अपने स्टाफ के वेतन के लिए करीब 50 हजार रुपये का भत्ता भी मिलता है। स्टेशनरी और अन्य कार्यालयी जरूरतों के लिए लगभग 25 हजार रुपये अलग से दिए जाते हैं।

इन भत्तों के अलावा सांसदों को कई सुविधाएं भी मिलती हैं। उन्हें दिल्ली में सरकारी आवास या बंगला मिलता है। अगर कोई सांसद सरकारी आवास नहीं लेना चाहता तो उसे घर भत्ता भी दिया जाता है। इसके अलावा सांसदों को हर साल 34 मुफ्त हवाई यात्राओं की सुविधा मिलती है। रेल यात्रा में फर्स्ट क्लास की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त मिलती हैं और बिजली-पानी भी तय सीमा तक मुफ्त दिया जाता है।

यदि इन सभी भत्तों और सुविधाओं को जोड़कर देखा जाए तो एक सांसद की कुल मासिक आय लगभग 2.5 लाख से 2.8 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है।

मुख्यमंत्री के रूप में कितनी मिलती है सैलरी?

बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार को हर महीने लगभग 2 लाख रुपये से अधिक वेतन मिलता है। विभिन्न भत्तों और सुविधाओं को जोड़ दिया जाए तो यह राशि लगभग 2.15 लाख रुपये से 2.6 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

मुख्यमंत्री को वेतन के अलावा कई विशेष सुविधाएं भी मिलती हैं। उन्हें पूरा मेंटेनेंस और स्टाफ के साथ सरकारी आवास मिलता है। मुख्यमंत्री पूरे राज्य और कई बार पूरे देश में आधिकारिक यात्रा के लिए सरकारी व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री को अपने और अपने परिवार के लिए संपूर्ण मेडिकल कवरेज मिलता है। इसके अलावा उन्हें उच्च स्तर की सुरक्षा, आमतौर पर Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है। आधिकारिक कार्यों के लिए लग्जरी कारें, ड्राइवर और एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध रहते हैं। मुख्यमंत्री के पास एक बड़ा पर्सनल स्टाफ होता है जिसमें सचिव, सहायक और अन्य कर्मचारी शामिल होते हैं। टेलीफोन, इंटरनेट और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मुफ्त मिलती हैं।

सैलरी में कितना अंतर?

अगर केवल बेसिक सैलरी की बात करें तो सांसद की सैलरी मुख्यमंत्री से कम होती है। सांसद की मूल सैलरी लगभग 1 लाख रुपये है, जबकि मुख्यमंत्री की बेसिक सैलरी उससे ज्यादा होती है।

लेकिन जब सांसदों को मिलने वाले भत्तों और अन्य वित्तीय लाभों को जोड़कर देखा जाता है तो उनकी कुल मासिक आय लगभग 2.5 से 2.8 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इस हिसाब से कुल आय के मामले में सांसद की कमाई मुख्यमंत्री के बराबर या कई बार थोड़ी ज्यादा भी हो सकती है।

पेंशन का भी मिलेगा फायदा

नीतीश कुमार के मामले में एक और दिलचस्प पहलू उनकी पेंशन है। वे कई बार विधायक रह चुके हैं और पहले सांसद भी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें विधायक और सांसद दोनों पदों की पेंशन का लाभ मिलता है।

रिपोर्टों के अनुसार उनकी कुल पेंशन करीब 2 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है। यह पेंशन उनकी सेवा अवधि के आधार पर तय होती है और भविष्य में भी उन्हें इसका लाभ मिलता रहेगा। इसलिए राज्यसभा में जाने के बाद भी उनके आर्थिक लाभों में कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है।

सुविधाओं और प्रोटोकॉल में होगा बड़ा बदलाव

हालांकि वेतन के मामले में ज्यादा फर्क नहीं होगा, लेकिन सुविधाओं और प्रोटोकॉल में जरूर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री के पास पूरे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी होती है। उनका आधिकारिक आवास बड़ा होता है और उनके साथ बड़ा सुरक्षा घेरा और स्टाफ होता है।

राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्हें दिल्ली में लुटियंस जोन में सरकारी आवास मिलेगा और सांसद स्तर की सुरक्षा भी दी जाएगी। हालांकि यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के मुकाबले थोड़ी कम होती है।

राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जाना नीतीश कुमार के लिए एक नई राजनीतिक भूमिका की शुरुआत हो सकती है। लंबे समय तक बिहार की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद अब वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी आय में बहुत बड़ा अंतर नहीं आएगा। भत्तों और पेंशन को जोड़कर देखा जाए तो राज्यसभा सांसद के रूप में भी उन्हें लगभग उतनी ही या उससे थोड़ी ज्यादा आर्थिक सुविधाएं मिल सकती हैं।

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