रेप-मर्डर केस में सजा काट रहा राम रहीम फिर जेल से बाहर, 40 दिन की पैरोल
अब तक 15 बार मिल चुकी है पैरोल-फरलो, वजहों पर उठते रहे हैं सवाल
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहा राम रहीम महज दो महीने के भीतर दूसरी बार 40 दिन की पैरोल पर रिहा हुआ है। यह उसकी अब तक की 15वीं पैरोल मानी जा रही है। हर बार की तरह इस बार भी पैरोल के समय और कारणों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए, लेकिन राम रहीम के मामले में नियम अलग दिखाई देते हैं।
कौन है गुरमीत राम रहीम सिंह
गुरमीत राम रहीम सिंह हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख रहा है। लाखों अनुयायियों वाले इस बाबा पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे, जिनकी जांच के बाद अदालत ने उसे दोषी ठहराया। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे अपने ही आश्रम की दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी, जिसमें दो अलग-अलग मामलों में 10-10 साल की सजा शामिल थी। इसके बाद 11 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई।
इसके अलावा, डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में भी 18 अक्टूबर 2021 को राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, हालांकि मई 2024 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच में खामियों का हवाला देते हुए उसे इस मामले में बरी कर दिया।
कितनी सजा काटी और कितने दिन बाहर रहा
अगर 25 अगस्त 2017 से अगस्त 2025 तक की अवधि को देखा जाए तो राम रहीम लगभग 8 साल यानी करीब 2900 दिनों से सजा काट रहा है। लेकिन इस दौरान पैरोल और फरलो के जरिए वह एक साल से भी अधिक समय जेल से बाहर रह चुका है। यही तथ्य सबसे ज्यादा विवाद का कारण बनता है।
पैरोल और फरलो की पूरी टाइमलाइन
राम रहीम को पहली बार 24 अक्टूबर 2020 को एक दिन की गुप्त पैरोल दी गई थी, ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सके। इसके बाद 2021 में उसे इलाज और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए कई बार एक-एक दिन या कुछ दिनों की पैरोल दी गई।
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2020: 1 दिन की पैरोल (मां से मिलने)
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2021: बीपी जांच, इलाज और मां से मिलने के नाम पर कई छोटी पैरोल
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फरवरी 2022: 21 दिन की फरलो, गोद ली बेटियों की शादी के लिए
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जून 2022: 30 दिन की पैरोल
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अक्टूबर 2022: 40 दिन की पैरोल
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जनवरी 2023: 40 दिन की पैरोल
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जुलाई 2023: 30 दिन की पैरोल
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नवंबर 2023: 21 दिन की फरलो
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जनवरी 2024: 50 दिन की पैरोल (लोकसभा चुनाव के समय)
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अगस्त 2024: 21 दिन की फरलो (विधानसभा चुनाव के दौरान)
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अक्टूबर 2024: 20 दिन की फरलो
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जनवरी 2025: 20 दिन की पैरोल
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अप्रैल 2025: 21 दिन की फरलो
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अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल
इस तरह अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह उसकी 15वीं बार जेल से बाहर आना है। दिलचस्प बात यह है कि राम रहीम का जन्मदिन 15 अगस्त को आता है और सजा मिलने के बाद उसने एक भी जन्मदिन जेल के अंदर नहीं मनाया।
बाहर आते ही फिर सक्रिय
हर बार की तरह इस बार भी जेल से बाहर आते ही राम रहीम के डिजिटल सत्संग, ऑनलाइन संदेश और अनुयायियों से संवाद शुरू हो गए हैं। हालांकि शर्तों के अनुसार उसे सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहना होता है, लेकिन उसके समर्थकों के बीच सक्रियता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
पैरोल की यह लंबी सूची देखकर आम लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे गंभीर अपराधों में दोषी कैदी को इतनी बार राहत मिलनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि यह न्याय व्यवस्था की भावना के खिलाफ है और इससे पीड़ितों को गलत संदेश जाता है।
वकील का पक्ष
राम रहीम के वकील का कहना है कि उसे जो भी पैरोल या फरलो मिली है, वह हरियाणा राज्य के “गुड प्रिजनर एक्ट” के तहत पूरी तरह कानूनी है। उनके अनुसार, हर कैदी को एक साल में तय अवधि की पैरोल और फरलो का अधिकार होता है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के तहत ही यह राहत दी जाती है। कानूनन पैरोल और फरलो कैदियों का अधिकार मानी जाती है, लेकिन राम रहीम के मामले में बार-बार और खास मौकों पर मिली राहत ने इसे आम अधिकार से अलग बहस का विषय बना दिया है। यही वजह है कि हर नई पैरोल के साथ सवाल और गहराते जाते हैं—क्या यह कानून का सामान्य पालन है या प्रभावशाली व्यक्ति को मिला विशेष लाभ।