स्वच्छता में फिर रचा गया इतिहास: इंदौर इस बार फिर बना नंबर-1… इस कैटेगरी में मिला इंदौर को पहला स्थान…CM डॉ.यादव ने दी बधाई कहा…गौरवांवित करने वाला क्षण
केन्द्र सरकार की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने वाले विभिन्न कैटेगरी के शहरों के नामों की घोषणा हो चुकी है। जिसमें एमपी के आठ शहरों ने नामांकन हासिल कर एक बार फिर प्रदेश को गर्व से भर दिया है। जिसमें इंदौर के साथ ही राजधानी भोपाल, उज्जैन, देवास, जबलपुर, ग्वालियर, बुदनी और शाहगंज को स्वच्छता की अलग अलग विभिन्न श्रेणियों में राष्ट्रीय सम्मान मिलने वाला है। ये सम्मान और पुरस्कार 17 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं नई दिल्ली में अपने हाथों से प्रदान करेंगी।
इस तरह मध्यप्रदेश ने एक बार फिर स्वच्छता के क्षेत्र में इतिहास रचा है। स्वच्छता सर्वेक्षण मिशन 2024 में इंदौर ने नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए स्वच्छ शहर बनने का गौरव प्राप्त किया। यही नहीं, उज्जैन और भोपाल जैसे प्रमुख नगरों ने भी अपने-अपने श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पूरे देश में प्रदेश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों, नगर निकायों, स्वच्छता कर्मियों, महापौरों, पार्षदों और आमजन को दिल से बधाई दी और कहा कि यह सम्मान पूरे प्रदेश की मेहनत और जनभागीदारी का परिणाम है।
इंदौर ने फिर किया कमाल: नई श्रेणी में भी अव्वल
इंदौर शहर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि स्वच्छता की राजधानी कहलाना केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है। इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण मिशन में इंदौर ने नई जोनल श्रेणी में भी पहला स्थान प्राप्त किया। यह लगातार आठवां वर्ष है जब इंदौर ने स्वच्छता में नंबर वन का ताज अपने सिर सजाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “इंदौर की इस निरंतर सफलता ने देशभर के शहरों के लिए एक नया मानक तय किया है। यह सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि नागरिकों के सतत प्रयासों का परिणाम है।”
उज्जैन भी चमका: 3 से 10 लाख की आबादी में देशभर में नंबर वन
स्वच्छता अभियान में उज्जैन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 से 10 लाख की जनसंख्या श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल किया। उज्जैन, जो धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विख्यात है, अब स्वच्छता मॉडल के रूप में भी देशभर में पहचाना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के प्रदर्शन को “धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए प्रेरणा” बताया और कहा कि यह उपलब्धि अवंतिका की गरिमा और संस्कृति को स्वच्छता के साथ जोड़ती है।
भोपाल की बढ़ती पहचान: स्वच्छता, सुंदरता और जीवनशैली का आदर्श नगर
राजधानी भोपाल ने भी स्वच्छता के क्षेत्र में अपना एक मजबूत स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “भोपाल अब सिर्फ झीलों का शहर नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता, साफ-सफाई और आदर्श जीवनशैली का प्रतीक बनता जा रहा है।”
भोपाल की हरित नीतियां, अपशिष्ट प्रबंधन, सफाईकर्मियों की तकनीकी प्रशिक्षण और नागरिक भागीदारी ने इसे तेजी से विकसित होते स्वच्छ और स्मार्ट शहरों की सूची में अग्रणी बनाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इंदौर की इस अद्भुत सफलता पर भारत की राष्ट्रपति महोदया द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। यह केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की उपलब्धि है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि “यह गौरव तभी संभव हुआ है जब प्रदेश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता संकल्प को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है।”
स्वच्छता के जरिए समृद्धि की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव और व्यवहार में सुधार है। इस सफलता के पीछे निगमों की रणनीति, टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल, नागरिकों की जागरूकता और जनभागीदारी जैसे कई कारक हैं। स्वच्छता ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और नागरिक स्वास्थ्य को भी सकारात्मक दिशा दी है। स्वच्छ शहरों में निवेश और पर्यटन के अवसर बढ़े हैं। इससे रोजगार और राजस्व दोनों में बढ़ोतरी हो रही है।