पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से 69 हजार से ज्यादा स्थानों पर लगे सौर संयंत्र, 65 हजार उपभोक्ताओं को मिला अनुदान। इंदौर जिले में करीब 30 हजार संयंत्र स्थापित।
मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ में अब घरों की छतें बिजली उत्पादन का नया केंद्र बन रही हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच पश्चिम मध्य प्रदेश के 15 जिलों में योजना का विस्तार हुआ है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार, अब तक 69,069 स्थानों पर सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। वहीं, करीब 65 हजार उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से 502 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है।
सवाल केवल सब्सिडी का नहीं, बिजली के खर्च में बचत का भी है।
योजना का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को अपनी छत पर सौर ऊर्जा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे उपभोक्ता अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं और नियमों तथा वास्तविक उत्पादन के अनुसार बिजली बिल में बचत कर सकते हैं। पात्र उपभोक्ताओं को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
यानी सरकार की आर्थिक सहायता से सौर संयंत्र लगाने की शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। लेकिन वास्तविक बचत संयंत्र की क्षमता, धूप, घरेलू बिजली खपत और बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े नियमों पर निर्भर करेगी।
इंदौर बना सौर ऊर्जा विस्तार का प्रमुख केंद्र
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर जिले में करीब 30 हजार सौर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इसके बाद उज्जैन और रतलाम में भी बड़ी संख्या में संयंत्र लगाए गए हैं। पूरे क्षेत्र में अब तक करीब 235 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
ये आंकड़े घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने की बढ़ती गतिविधियों को दर्शाते हैं। हालांकि, संयंत्रों की संख्या के साथ यह देखना भी जरूरी है कि उनसे कितनी बिजली पैदा हो रही है और उपभोक्ताओं के बिल में कितनी वास्तविक बचत दर्ज हो रही है।
502 करोड़ की सब्सिडी, आगे भी जारी है प्रक्रिया
कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के अनुसार, योजना का लाभ अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कंपनी स्तर पर और विभिन्न सर्कलों में आवेदन प्रक्रिया तथा जनजागरूकता से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा इसकी नियमित समीक्षा भी की जा रही है। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जा रही है।
योजना के विस्तार में जागरूकता के साथ समय पर आवेदन, सही दस्तावेज और संयंत्र की स्थापना के बाद जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करना महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी की पात्रता, आवेदन की स्थिति और भुगतान की जानकारी स्पष्ट होना भी जरूरी है।
पर्यावरण के लिए लाभ, लेकिन रखरखाव भी जरूरी
सौर ऊर्जा का विस्तार पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है। घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने से बिजली उत्पादन उपभोक्ता के परिसर में ही संभव होता है। इससे ऊर्जा के अधिक विकेंद्रीकृत उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
हालांकि, संयंत्र लगाने के बाद उसका सही रखरखाव, पर्याप्त धूप, उपकरणों की गुणवत्ता और जरूरत पड़ने पर मरम्मत की सुविधा भी जरूरी है। उपभोक्ताओं को केवल शुरुआती सब्सिडी नहीं, बल्कि लंबे समय तक मिलने वाले लाभ को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
छतों से बिजली उत्पादन की ओर बढ़ते कदम
मालवा-निमाड़ में 69,069 स्थानों पर सौर संयंत्रों की स्थापना, करीब 235 मेगावाट क्षमता और 502 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी योजना के मौजूदा विस्तार को दर्शाती है। इंदौर इस बदलाव का प्रमुख केंद्र बनकर सामने आया है।
अब आगे की चुनौती अधिक पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने, सब्सिडी प्रक्रिया को सुगम बनाने और सौर संयंत्रों से वास्तविक बिजली उत्पादन तथा बचत सुनिश्चित करने की है। यदि इन पहलुओं पर लगातार ध्यान दिया जाता है, तो पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना घरेलू उपभोक्ताओं के खर्च में राहत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।