गीजर, कूलर और पंखे खरीदना होगा महंगा, कॉपर से लेकर प्लास्टिक तक की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा घरेलू बजट
घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों पर कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर पड़ रहा है। गीजर, कूलर और पंखे जैसे रोजमर्रा के सामान बनाने में कई तरह की धातुओं, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का इस्तेमाल होता है। इनकी कीमतें बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। इसका असर अब ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। अगर आप घर के लिए नया गीजर, कूलर या पंखा खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। इन उपकरणों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से इनके निर्माण की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा खर्चीली हो गई है। कच्चे माल से लेकर तैयार सामान को बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ना भी कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल है।
आधुनिक तकनीक और माइक्रोचिप के बढ़ते इस्तेमाल से महंगे हो रहे घरेलू उपकरण
आज बाजार में मिलने वाले पंखे, कूलर और गीजर पहले की तुलना में अधिक सुविधाओं के साथ आते हैं। कई पंखों में रिमोट कंट्रोल, बिजली की खपत कम करने वाली तकनीक और आधुनिक मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, नए गीजर में ऑटोमैटिक कटऑफ, तापमान नियंत्रित करने वाली व्यवस्था और स्मार्ट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इन फीचर्स को तैयार करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर और माइक्रोचिप की जरूरत पड़ती है। इन पुर्जों की लागत बढ़ने पर पूरे उपकरण को बनाने का खर्च भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, तकनीक से जुड़े कुछ पुर्जों की उपलब्धता और सप्लाई में आने वाली परेशानियां भी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में आधुनिक सुविधाओं वाले उपकरणों की कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, हर उत्पाद की कीमत में बढ़ोतरी समान नहीं होती, क्योंकि इसका असर उसकी तकनीक, ब्रांड और निर्माण लागत पर निर्भर करता है।
कॉपर और एल्युमिनियम की कीमतों में तेजी से मोटर और बॉडी बनाने का खर्च बढ़ा
घरेलू उपकरणों के निर्माण में कॉपर और एल्युमिनियम की अहम भूमिका होती है। कॉपर का इस्तेमाल पंखों और कूलरों की मोटर की वाइंडिंग सहित बिजली से जुड़े कई हिस्सों में किया जाता है। गीजर में भी इसके कुछ विद्युत घटकों में इस्तेमाल की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर, एल्युमिनियम का उपयोग उत्पाद के डिजाइन के अनुसार ब्लेड, मोटर के हिस्सों और अन्य संरचनात्मक भागों में किया जाता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर की कीमतों में लगभग अठारह से बाईस प्रतिशत तक और एल्युमिनियम में करीब बारह से पंद्रह प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है। इन धातुओं के महंगे होने से मोटर और दूसरे पुर्जे तैयार करने की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित कंपनी कितनी मात्रा में इन धातुओं का इस्तेमाल करती है और उसने कच्चा माल किस कीमत पर खरीदा है।
कच्चे तेल से जुड़े प्लास्टिक की लागत बढ़ने से उपकरणों की कीमतों पर पड़ रहा असर
गीजर, कूलर और पंखे बनाने में प्लास्टिक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। कूलर की बाहरी बॉडी, गीजर का आवरण, स्विच और कई अन्य हिस्सों के निर्माण में अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक और पॉलिमर काम आते हैं। इन सामग्रियों की कीमतों पर कच्चे तेल के बाजार का असर पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्लास्टिक और पॉलिमर की लागत में लगभग दस से बारह प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है। इसके साथ ही विदेशों से सामान और पुर्जे मंगाने या तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ने पर भी कंपनियों का बजट प्रभावित होता है। हालांकि, प्लास्टिक की कीमत में बदलाव का सीधा असर हर उत्पाद पर एक जैसा नहीं पड़ता। इसकी मात्रा, गुणवत्ता और सप्लाई व्यवस्था के अनुसार लागत में अंतर हो सकता है। कंपनियां जब इन बढ़े हुए खर्चों को अपनी बिक्री कीमतों में शामिल करती हैं, तो ग्राहकों को उपकरण खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
गीजर, कूलर और पंखों की बढ़ती कीमतों से घर के बजट पर पड़ सकता है अतिरिक्त बोझ
कच्चे माल और निर्माण लागत में बढ़ोतरी का असर घरेलू उपकरणों की कीमतों में दिखाई दे सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गीजर की कीमत में लगभग आठ सौ से पंद्रह सौ रुपये तक और सीलिंग पंखे तथा कूलर की कीमतों में करीब तीन सौ से बारह सौ रुपये तक की बढ़ोतरी बताई गई है। हालांकि, ये बढ़ोतरी सभी कंपनियों और मॉडलों पर लागू होना जरूरी नहीं है। कीमतें उत्पाद की क्षमता, फीचर्स, गुणवत्ता और कंपनी की नीति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। रसोई में इस्तेमाल होने वाले मिक्सर ग्राइंडर और चिमनी की लागत भी मोटर, धातु और दूसरे पुर्जों की कीमतों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में घरेलू सामान खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों और मॉडलों की कीमतों की तुलना करना उपयोगी रहेगा। कुल मिलाकर, कॉपर, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की लागत में बढ़ोतरी घरेलू उपकरणों को महंगा बनाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।