भारतीय शेयर बाजार में फरवरी 2026 आईटी सेक्टर के लिए भारी गिरावट लेकर आई है। 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट के बाद पहली बार इतनी बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की गई है। आईटी शेयरों में आई इस “ब्लडबाथ” ने देश की दो सबसे भरोसेमंद निवेश संस्थाओं—Life Insurance Corporation of India (LIC) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स—को गहरा झटका दिया है। सिर्फ एक महीने में इन दोनों संस्थाओं के पोर्टफोलियो से करीब ₹1.18 लाख करोड़ की काल्पनिक (नोटional) वैल्यू मिट गई है। यह नुकसान उन करोड़ों आम निवेशकों की बचत से जुड़ा है, जो बीमा पॉलिसी और म्यूचुअल फंड्स के जरिए बाजार में निवेश करते हैं।
2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट
आईटी सेक्टर को ट्रैक करने वाला Nifty IT Index फरवरी महीने में अब तक लगभग 21% गिर चुका है। 24 फरवरी 2026 को अकेले इस इंडेक्स में 5% की गिरावट दर्ज की गई। यह 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है। आईटी सेक्टर को लंबे समय से निवेशकों के पोर्टफोलियो का स्थिर और भरोसेमंद हिस्सा माना जाता था। लेकिन 2026 में वैश्विक मांग में कमी, तकनीकी बदलाव और आय (earnings) को लेकर अनिश्चितताओं ने इस सेक्टर को कमजोर कर दिया है।
म्यूचुअल फंड्स को ₹74,666 करोड़ का झटका
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के अंत तक शीर्ष आईटी शेयरों में घरेलू म्यूचुअल फंड्स की कुल हिस्सेदारी ₹3,55,600 करोड़ थी। लेकिन 24 फरवरी तक यह घटकर ₹2,80,933 करोड़ रह गई। यानी चार हफ्तों से भी कम समय में ₹74,666 करोड़ की वैल्यू मिट गई। यह गिरावट सीधे तौर पर उन लाखों निवेशकों को प्रभावित करती है, जिन्होंने SIP या अन्य योजनाओं के जरिए आईटी कंपनियों में निवेश किया था।
LIC की आईटी होल्डिंग में भारी गिरावट
Life Insurance Corporation of India की आईटी शेयरों में निवेशित राशि भी पिछले दो महीनों में ₹42,500 करोड़ घट गई है।
सबसे अधिक असर दो दिग्गज कंपनियों पर पड़ा:
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Infosys
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Tata Consultancy Services
इन दोनों में संयुक्त रूप से ₹26,510 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा LTI Mindtree, Tech Mahindra, Persistent Systems, HCL Technologies और Coforge जैसे अन्य आईटी शेयरों में 5.2% से 6.5% तक की गिरावट आई है।
LIC का विविधीकृत पोर्टफोलियो
हालांकि आईटी सेक्टर में गिरावट बड़ी है, लेकिन LIC का निवेश पोर्टफोलियो काफी विविधीकृत (diversified) है।
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31 दिसंबर 2025 तक कुल इक्विटी पोर्टफोलियो: ₹17.83 लाख करोड़
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आईटी शेयरों में हिस्सेदारी: 12.43% (₹2.17 लाख करोड़)
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वित्तीय शेयरों में हिस्सेदारी: 26.52% (₹4.64 लाख करोड़)
इस विविधता के कारण कुल पोर्टफोलियो पर दबाव तो है, लेकिन पूरा ढांचा अस्थिर नहीं हुआ है। फिर भी आईटी में आई गिरावट का असर साफ दिखाई दे रहा है।
गिरावट के पीछे क्या कारण?
विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर आईटी खर्च में कटौती, अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में अनिश्चितता, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व ऑटोमेशन के चलते पारंपरिक आईटी सेवाओं पर दबाव—ये सभी कारक गिरावट के पीछे हैं। इसके अलावा, डॉलर की चाल और वैश्विक ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
निवेशकों के लिए सबक
यह गिरावट एक बड़ा संकेत है कि सेक्टर-विशिष्ट जोखिम (sectoral risk) कितना प्रभाव डाल सकता है। यहां तक कि LIC जैसी विशाल और अनुभवी संस्था भी इससे अछूती नहीं रही। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए और किसी एक सेक्टर पर अत्यधिक निर्भरता से बचना चाहिए। आईटी शेयरों में आई ऐतिहासिक गिरावट ने फरवरी 2026 को बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण महीना बना दिया है। हालांकि LIC और म्यूचुअल फंड्स के पास विविधीकृत पोर्टफोलियो है, फिर भी यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बड़े से बड़े संस्थागत निवेशक भी सेक्टोरल गिरावट से प्रभावित हो सकते हैं। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर आईटी सेक्टर की कमाई, वैश्विक मांग और नीति संकेतों पर रहेगी—ताकि यह तय किया जा सके कि यह गिरावट अस्थायी है या लंबी अवधि का संकेत।





