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हिमाद्री सिंह-नरेंद्र मरावी का रिश्ता खत्म, लेकिन कहानी सिर्फ तलाक की नहीं

DigitalDesk by DigitalDesk
September 15, 2026
in जबलपुर, मध्य प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति
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Himadri Singh and Narendra Maravi
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कहते हैं राजनीति में रिश्ते बनते भी हैं और बदलते भी हैं, लेकिन जब बात किसी बड़े राजनीतिक परिवार और दो नेताओं के निजी रिश्ते की हो तो कहानी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रह जाती। जी हां हम बात कर रहे हैं शहडोल से बीजेपी सांसद हिमाद्री सिंह की, जिन्होंने अपने पति नरेन्द्र मरावी से तलाक ले लिया है।
दरअसल बीजेपी की युवा सांसद हिमाद्री सिंह का ताल्लुक मध्यप्रदेश के बड़े आदिवासी राजनीतिक परिवार से है। हिमाद्री के पिता दलवीर सिंह कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी नेताओं में शुमार रहे हैं वे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में मंत्री भी रहे थे। हिमाद्री सिंह की मां नंदिनी सिंह भी कोतमा की विधायक और शहडोल से सांसद रह चुकी थीं। हिमाद्री सिंह के माता और पिता दोनों का देहांत हो चुका है।

हिमाद्री सिंह 2 बार रहीं BJP सांसद
पति से लिया हिमाद्री सिंह ने तलाक
साल 2017 में नरेन्द्र मरावी से हुई थी शादी

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राजनीति में रिश्ते बनते भी हैं और बदलते भी हैं, लेकिन जब बात किसी बड़े राजनीतिक परिवार और दो नेताओं के निजी रिश्ते की हो तो कहानी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रह जाती। मध्यप्रदेश की आदिवासी राजनीति से जुड़े दो चर्चित नाम—शहडोल से बीजेपी सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी—अब कानूनी तौर पर पति-पत्नी नहीं रहे। दोनों के तलाक पर अदालत ने डिक्री पारित कर दी है।
दोनों पिछले कई वर्षों से अलग रह रहे थे। ऐसे में अदालत का फैसला उनके लंबे समय से चले आ रहे अलगाव को अब कानूनी रूप देता है। हालांकि उनके रिश्ते में दरार की वास्तविक वजह क्या रही, इसे लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई विस्तृत और पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए राजनीतिक चर्चाओं को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

एक शादी, दो राजनीतिक परिवार और बदलती कहानी

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी की शादी 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में हुई थी। दोनों की एक बेटी गिरिशा कुमारी सिंह है, जो हिमाद्री सिंह के साथ रहती हैं। यह शादी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि दोनों का संबंध राजनीति से रहा है। हिमाद्री सिंह मध्यप्रदेश के एक बड़े आदिवासी राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता दलवीर सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता रहे और राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। उनकी मां राजेश नंदिनी सिंह भी विधायक और सांसद रह चुकी थीं। यानी हिमाद्री सिंह के लिए राजनीति कोई अचानक चुना हुआ रास्ता नहीं था, बल्कि यह उनके परिवार की राजनीतिक विरासत का हिस्सा रही है।

कांग्रेस से बीजेपी तक हिमाद्री का बढ़ता कद

हिमाद्री सिंह ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और शहडोल लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। इसके बाद 2024 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। इस तरह हिमाद्री सिंह ने कम समय में अपनी पहचान एक प्रमुख युवा आदिवासी महिला नेता के तौर पर बनाई। संसद में उनकी मौजूदगी और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भागीदारी ने भी उनके राजनीतिक प्रोफाइल को विस्तार दिया। यही वजह है कि उनके निजी जीवन से जुड़ा कोई भी घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन जाता है।

नरेंद्र मरावी की भी अपनी राजनीतिक पहचान

दूसरी तरफ नरेंद्र सिंह मरावी भी राजनीति से अनजान नाम नहीं हैं। उनका संबंध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और बीजेपी की राजनीति से रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में हिमाद्री सिंह की मां राजेश नंदिनी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने पुष्पराजगढ़ विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ा, लेकिन यहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली। नरेंद्र मरावी बाद में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रहे। यानी दोनों के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े रहे।

जब राजनीति में बढ़ा हिमाद्री का कद, बदले समीकरण

इस रिश्ते की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू राजनीतिक सफर में आया बदलाव है। शादी के बाद हिमाद्री सिंह का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। वह बीजेपी के टिकट पर लगातार दो लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। दूसरी ओर नरेंद्र मरावी की चुनावी राजनीति में वह सफलता नहीं आई। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनके बीजेपी से टिकट की कोशिशों की चर्चा रही। इसी दौर में दोनों के लंबे समय से अलग रहने की खबरें भी सामने आती रहीं। लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा, टिकट या राजनीतिक मतभेद को उनके तलाक की वजह मानना केवल अटकल होगी। अदालत के फैसले के बाद भी रिश्ते के टूटने की वास्तविक वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।

तलाक के बाद क्या बदलेगा?

कानूनी तौर पर वैवाहिक रिश्ता खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल अब राजनीतिक असर को लेकर है। हिमाद्री सिंह के लिए यह उनके निजी जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन राजनीतिक रूप से उनका कद फिलहाल उनकी लगातार चुनावी सफलता और आदिवासी क्षेत्र में उनकी पकड़ से तय होगा। शहडोल की राजनीति में उनका अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार बन चुका है। नरेंद्र मरावी के लिए भी यह एक नई राजनीतिक शुरुआत का बिंदु हो सकता है। हालांकि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा, यह भविष्य तय करेगा।

इस पूरी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक रिश्ता खत्म हुआ है, लेकिन दो लोगों की राजनीतिक यात्राएं अभी जारी हैं। हिमाद्री सिंह की कहानी एक ऐसे राजनीतिक परिवार की विरासत से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की कहानी है, जबकि नरेंद्र मरावी की कहानी संगठनात्मक राजनीति, चुनावी संघर्ष और आदिवासी राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश से जुड़ी रही है। इसलिए इसे सिर्फ एक चर्चित तलाक की खबर के तौर पर देखना अधूरा होगा। यह निजी रिश्ते के अंत के साथ दो अलग-अलग राजनीतिक यात्राओं के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।

Tags: #Himadri Singh #Narendra Maravi relationship #ended but the story goes beyond just divorce
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