तृतीय विश्व युद्ध की आहट,दक्षिणी लेबनान से हिज्बुल्लाह ने किया उत्तरी इजरायल के इलाकों में दर्जनों रॉकेट से हमला

मध्य एशिया में बढ़ते टकराव के बीच हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के इलाकों में दर्जनों रॉकेट से हमला किया हैहै। रिपोर्ट में इस हमले का दावा किया जा रहा है। हांलाकि इस घटना पर अब तक इजरायल ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
दरअसल कुछ महीने पहले जब इजरायल पर हमास ने हमला किया था और सैकड़ों लोगों को मार डाला था। तबसे भड़के तनाव ने करोडों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है।

हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के इलाकों में दागे रॉकेट
इजराइल की ओर दागे 50 रॉकेट
इसराइल पर आधी रात में बरसाए रॉकेट
क्या तृतीय विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युद्ध विराम की मांग और उम्मीद लगातार को जा रही थी, लग रहा था कि दोनों तरफ से तनाव कम होगा लेकिन हमास प्रमुख इस्माइल हनिये की जिस तरह हत्या की गई है और हमास के मिलिट्री कमांडर को भी मार दिया गया है। इससे न केवल शांति की उम्मीदों को गहरा थक्का लगा है। बल्कि दूसरे परोक्ष अपरोक्ष युध्द का खतरा दिखाई दे रहा है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ते टकराव के चलते गाजा पट्टी में अब आम जिंदगी बद से बदत्तर हो गई। जिंदगी किस दशा में चली गई है, इस बात को सभी जानते हैं।

हमास और इजराइल के बीच युद्ध के दौरान त्रासदी का स्तर लगातार अधिक गहराते जाने के दौर में कई तरफ से इजराइल पर युद्ध विराम के लिए दबाव बनाने की कोशिशें भी कीं अमेरिका ने भी अपने सहयोगी से युद्ध विराम की उम्मीद की थी। हालांकि हमास पर हमले को लेकर इजराइल का रुख स्पष्ट बना रहा। वह कोई नरमी नहीं दिखायेगा। अब खुद ईरान भी हनिया की मौत का बदला लेने की बात कह रहा है। हालांकि अमेरिका ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। ईरान पर जवाबी कार्रवाई न करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। लेकिन उसकी अनदेखी कर अगर ईरान ऐसा कोई कदम उठाता है, तो उसके नतीजों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।

हनिया की मौत के बाद समूचे मिडिल ईस्ट में तनाव

दरअसल, हनिया की मौत के बाद समूचे मिडिल ईस्ट में जिस स्तर का तनाव उभरा वह चिंताजनक है।
आशंका यहां तक जताई जाने लगी हैं कि हनिया की मौत के बाद उपजे हालात में अब ईरान इजराइल पर सीधा हमला भी कर सकता है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर युद्ध एक बार शुरू हो जाता है तब उसके बाद उसके अंत का स्वरूप शाति चाहने वाले समुदायों और देशों की इच्छा के अनुरूप नहीं होता है। इसलिए हमास को सबक सिखाने का नाम इजराइल ने लेकर जो जिद पकड़ली है। उसने दुनिया के एक बड़े हिस्से को चिंता में डाल दिया है।
संघर्ष विराम की उम्मीदों के बीच समूचे मध्य पूर्व में इस तनाव के गहराने और युद्ध के नए मुद्राने खुल जाने की आशंका बढ़ गई है। वैसे भी दुनिया में कई देश किसी न किसी वजह से तनाव के शिखर पर हैं। रूस व यूक्रेन के बीच युध्द करीब डेढ़ साल से चल रहा है, इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा। इससे भी लाखों परिवार की जिंदगी तबाह हो रही है।

युद्ध किसी समस्या का निदान नहीं

युद्ध ही सभी समस्याओं का हल नहीं हो सकता। यह बात इतिहास से सीखी जा सकती है। इसके के बजाए खुले दिल और दिमाग से बात और पुराने तनाव को छोड़कर आगे बढने के ईमानदार जज्बात ही कारगर हो सकते हैं। अन्यथा युध्द का परिणाम केवल वह देश हीं नहीं भुगतते जहां युद्ध हो रहा होता है बल्कि कई अन्य देश भी इसके अल्पकालिक या दीर्घकालिक प्रभाव का सामना करते हैं।

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