अहमदाबाद। प्रधानमंत्री की मां हीरा बा का 100 वर्ष की उम्र में शुक्रवार सुबह निधन हो गया। उनकी मौत की सूचना प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट से ही दी। भावुक पीएम ने मां की शिक्षा को भी बांटा। इसके बाद वह अहमदाबाद गए और वहां मां की अर्थी को कांधा दिया। पीएम ने प्रोटोकॉल तोड़ कर शववाहिनी से ही यात्रा की।
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वह एक बेटे के तौर पर अपनी मां की शवयात्रा में शामिल हुए, न कि प्रधानमंत्री के तौर पर।

हीरा बा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। उन्होंने अहमदाबाद के अस्पताल यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में अंतिम सांस ली। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम… मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है।’
https://twitter.com/narendramodi/status/1608622111660331012?s=20&t=vLdTlnp3wWIxq4yDaijBxw
मां…से बहुत जुड़े हैं प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री की मां हीरा बा की 27 दिसंबर शाम को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। सांस लेने में दिक्कत होने पर उनको आनन-फानन में अहमदाबाद के यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया। गुरुवार को अस्पताल की ओर से बयान जारी कर बताया गया था कि उनकी तबीयत में सुधार है. लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने दुनिया छोड़ दी। वैसे, गुरुवार को पीएम मोदी अस्पताल में मां हीरा बा से मिलने पहुंचे थे और वहां करीब डेढ़ घंटे रहे थे।
पीएम अपनी मां के बहुत करीब थे और अपने हरेक जन्मदिन पर ही लगभग उनका आशीर्वाद लेने जाते थे। जिस तरह जीजाबाई ने शिवाजी को गढ़ा और बनाया था, उसी तरह हीराबा को मोदी हमेशा अपनी प्रेरक शक्ति बताते थे। मां की मृत्यु की सूचना देते हुए भी उन्होंने कहा कि मां हमेशा बताती थी कि जीवन जियो शुद्धि से और काम करो बुद्धि से। यह गुजराती कहावत बहुत कुछ सीख देने वाली भी है और शायद 2024 के कुछ संकेत भी देती है।
हीरा बा एक बड़ा और भव्य जीवन जी कर गई हैं। एक शताब्दी का अनुभव उनके पास था। यह कम नहीं होता। प्रधानमंत्री के पास से आज मां की छाया भी छिन गयी है। वह मां जो ममता का आंचल देती थी। अब प्रधानमंत्री सबसे बड़े हो गए हैं। कोई उन्हें सलाह देनेवाला, कोई पुचकारनेवाला नहीं रहा। यह कमी नरेंद्रभाई मोदी को खलेगी तो जरूर ही।
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