उत्तरकाशी में भारी बारिश का कहर.. रेस्क्यू ऑपरेशन पर मौसम की मार

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उत्तरकाशी में भारी बारिश का कहर.. रेस्क्यू ऑपरेशन पर मौसम की मार

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे उत्तरकाशी जिले में मौसम फिर से चुनौती बनकर सामने खड़ा हो गया है। मौसम विभाग ने जिले में अगले तीन दिनों तक आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसका सीधा असर राहत और बचाव कार्यों पर पड़ा है। आपदाग्रस्त धराली गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज हवाओं और वर्षा के कारण रोकना पड़ा है।

तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट

हेलीकॉप्टर ऑपरेशन रोका गया

उत्तरकाशी आपदा क्षेत्र

अब तक 566 लोगों को बचाया गया

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित इलाकों तक जमीनी पहुंच संभव नहीं हो पा रही है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिये राहत-सामग्री और बचाव दलों को भेजा जा रहा था, लेकिन गुरुवार देर शाम से मौसम के बिगड़ते मिजाज के कारण हवाई अभियान भी ठप हो गया है। शुक्रवार को चिनूक हेलीकॉप्टर जेनरेटर लेकर उत्तरकाशी जा रहा था, लेकिन खराब मौसम की वजह से उसे चिन्यालीसौड़ में ही लैंड करना पड़ा।

हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगड़ने के चलते उसे बीच रास्ते से वापस बुलाना पड़ा। शुक्रवार शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच भारी बारिश का अलर्ट था, और उसी दौरान तेज बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं भी चलीं, जिससे अभियान और कठिन हो गया।

मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 अगस्त तक उत्तरकाशी जिले में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी संभावित हैं। 11 अगस्त को भी येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इस चेतावनी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

केवल उत्तरकाशी ही नहीं, राज्य के अन्य पर्वतीय जिलों देहरादून, चमोली, पौड़ी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर में भी अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया है।

566 लोगों का अब तक रेस्क्यू

धराली गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को निकालने का कार्य तेजी से जारी है। शुक्रवार को 128 और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जिससे अब तक कुल 566 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। राहत कार्यों में उत्तराखंड सरकार के साथ ही सेना और NDRF की टीमें भी सक्रिय हैं।

सेना के चिनूक और एम-17 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके जरिये उन्नत उपकरण और जरूरी खाद्य सामग्री भी प्रभावित गांवों में पहुंचाई जा रही है। NDRF के एक अधिकारी ने बताया कि सड़कें टूट जाने के कारण जमीनी रास्तों से राहत पहुंचाना संभव नहीं है, इसलिए हवाई मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा है।

लापता लोगों की तलाश जारी

धराली में हुए भूस्खलन के बाद कई लोग लापता हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए एडवांस्ड सर्च इक्विपमेंट और डॉग स्क्वॉड का सहारा लिया जा रहा है। बचाव दल लगातार खराब मौसम के बीच काम कर रहे हैं, लेकिन हर पल की चुनौती उनके प्रयासों को मुश्किल बना रही है।

राहत सामग्री के रूप में खाद्यान्न, दवाइयां और टॉर्च जैसी जरूरी वस्तुएं हेलीकॉप्टरों से ड्रोप की जा रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं जो राहत शिविरों में तैनात हैं।

प्रशासन ने लोगों से किया अपील

उत्तरकाशी प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम की गंभीरता को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर गंगोत्री, यमुनोत्री मार्गों पर जाने से फिलहाल परहेज करने को कहा गया है।

प्रशासन का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अगले कुछ दिनों तक राहत कार्यों में और देरी हो सकती है। स्थानीय स्तर पर पुलिस और राजस्व टीम को भी सतर्क किया गया है, ताकि किसी नई आपदा की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।

उत्तरकाशी और आस-पास के इलाकों में आपदा के हालात के बीच मौसम फिर से चुनौती बन गया है। प्रशासन और राहत एजेंसियां पूरी कोशिश कर रही हैं कि बचाव कार्य बिना किसी और नुकसान के पूरा किया जा सके, लेकिन मौसम का मिजाज फिलहाल राहत नहीं दे रहा है। अगले कुछ दिन इस आपदा से निपटने के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

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