900 करोड़ का हवाला नेटवर्क…ईडी ने की केजरीवाल और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ देश के तीन शहरों में ये बड़ी कार्रवाई..विदेश भेज रहे थे देश का धन!
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह देश के तीन प्रमुख शहरों—रांची, मुंबई और सूरत—में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए 900 करोड़ रुपये से अधिक के हवाला नेटवर्क पर शिकंजा कसा। यह छापेमारी एक ऐसे व्यापक ऑपरेशन का हिस्सा है। जिसकी जड़ें विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के गंभीर उल्लंघन से जुड़ी बताई जा रही हैं। ईडी के सूत्रों से से मिली जानकारी के अनुसार यह नेटवर्क लंबे समय से विदेशों में पैसे भेजने और भारत में ब्लैक मनी को वैध रूप देने के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल कर रहा था।
कार्रवाई का आधार क्या है?
ईडी की कार्रवाई FEMA की धारा 37 के तहत अधिकृत तलाशी अभियान का हिस्सा है। यह धारा उन मामलों में लागू होती है, जिनमें विदेशी मुद्रा के गलत लेन-देन, फर्जी दस्तावेजों के जरिए मनी ट्रांसफर या देश से अवैध धन भेजने की आशंका होती है।
अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी को इस नेटवर्क के खिलाफ लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला कि यह गिरोह शेल कंपनियों, फर्जी बिलिंग, ओवर इनवॉइसिंग और अंडर इनवॉइसिंग के जरिए पैसा विदेश भेजता था। इसी आधार पर एजेंसी ने एक साथ कई स्थानों पर छापामार कार्रवाई शुरू की।
कौन है इस नेटवर्क का मुख्य सरगना?
इस जांच का प्रमुख चेहरा है नरेश कुमार केजरीवाल, जो पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट बताया जाता है। एजेंसी का आरोप है कि केजरीवाल न सिर्फ बड़े व्यवसायी समूहों को अवैध हवाला ट्रांजेक्शन में मदद करता था, बल्कि उसकी अपनी टीम और रिश्तेदार भी इस नेटवर्क को फैलाने में शामिल थे।
जांच में सामने आया कि केजरीवाल और उसके सहयोगियों ने रांची, मुंबई और सूरत में ऐसे कई ठिकाने बना रखे थे, जिनका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज बनाने, बोगस कंपनियों के अकाउंट्स संचालित करने और नकदी को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर में बदलने के लिए किया जाता था।
तीन शहरों में एक साथ छापेमारी क्यों?
एजेंसी के पास इनपुट थे कि हवाला नेटवर्क की जड़ें एक ही शहर तक सीमित नहीं हैं। पैसा रांची से संगठित होता था, सूरत में नेटवर्क की गुप्त नकदी इकाइयाँ थीं, और मुंबई में विदेशी ट्रांसफर का डिजिटल सेटअप।
इसी रणनीति को तोड़ने के लिए ईडी ने तीनों शहरों में एक साथ दबिश दी, ताकि नेटवर्क के सदस्य एक-दूसरे को सूचना न दे सकें और किसी तरह की डिजिटल या फिजिकल एविडेंस डिलीट न हो पाए।
क्या-क्या बरामद हुआ?
सुबह से जारी तलाशी अभियान में एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, नकदी और विदेशी करंसी हाथ लगी है। ईडी अधिकारियों के मुताबिक कई हार्ड डिस्क, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। फर्जी बिलिंग से जुड़े दस्तावेज मिले। कुछ स्थानों पर विदेशी मुद्रा और बड़ी मात्रा में नकदी भी मिलने की जानकारी है। शेल कंपनियों के नाम और डायरेक्टरों की लिस्ट मिली है, जिनके जरिए करोड़ों का लेन-देन किया गया। सूत्रों का दावा है कि बरामद दस्तावेजों से इस नेटवर्क का आकार 900 करोड़ से भी बड़ा हो सकता है। जांच आगे बढ़ने पर यह राशि और बढ़ सकती है।
कैसे काम करता था हवाला नेटवर्क?
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क अत्याधुनिक तकनीक और पुराने हवाला तरीकों—दोनों का मिश्रण था। शेल कंपनियों के जरिए वैध लेन-देन का दिखावा किया जाता था असल में ये कंपनियाँ सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं। इनका इस्तेमाल फर्जी इनवॉइस तैयार करने और पैसा एक खाते से दूसरे खाते में घुमाने के लिए होता था। देश में आने-जाने वाले पैसों को डिजिटल ट्रांजेक्शन से जोड़कर असली स्रोत को छुपाया जाता था। विदेशों में पैसा भेजने के लिए हवाला चैनल सक्रिय थे, जहां राशि बिना किसी बैंकिंग ट्रेल के पहुंचाई जाती थी।
परिवार के सदस्य भी रडार पर
ईडी ने नरेश केजरीवाल के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली है। एजेंसी का आरोप है कि परिवार के कई सदस्यों के नाम पर शेल कंपनियाँ रजिस्टर थीं। इन्हीं के नाम पर बैंक अकाउंट खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल करोड़ों के ट्रांजेक्शन में हुआ।
अब आगे क्या?
ईडी ने सभी बरामद डिजिटल और फिजिकल सबूतों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। नेटवर्क से जुड़े और नामों का खुलासा हो सकता है। कुछ गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस हवाला चैनल का संबंध विदेशों में बैठे किसी बड़े सिंडिकेट से है। अगर ऐसा हुआ तो जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाएगी।
सरकार का सख्त रुख
पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के मामलों पर नकेल कसने के लिए कई एजेंसियों को सक्रिय रखा है। ईडी की यह ताजा कार्रवाई उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि 900 करोड़ के इस नेटवर्क को तोड़ना देश में अवैध वित्तीय गतिविधियों पर बड़ा प्रहार होगा।
900 करोड़ रुपये से जुड़े हवाला मामले में ईडी की यह कार्रवाई सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि एक संगठित अवैध वित्तीय प्रणाली पर निर्णायक हमला माना जा रहा है। आने वाले समय में जब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा के विश्लेषण से कई चौकाने वाले खुलासे होने की संभावना है। एजेंसी आगे की जांच में इस नेटवर्क के सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि अवैध विदेशी मुद्रा लेन-देन पर पूरी तरह विराम लगाया जा सके।





