अचानक फिर कम हुए चांदी के भाव… हाई से अब ₹1.59 लाख सस्ती, सोना भी फिसला
सोना-चांदी फिर लुढ़के, निवेशकों में बढ़ी हलचल
कीमती धातुओं के बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार की शुरुआत के साथ ही सोना और चांदी दोनों के दामों में गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर चांदी की कीमतों में आई तेज कमी ने निवेशकों को चौंका दिया है। अपने उच्चतम स्तर से चांदी अब करीब 1.59 लाख रुपये तक सस्ती हो चुकी है, जबकि सोने की कीमतों में भी नरमी का रुख बना हुआ है।
- बाजार में फिर बड़ी गिरावट
- हाई से ₹1.59 लाख सस्ती
- सोने के दाम भी फिसले
- वैश्विक संकेतों का बड़ा असर
- निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी
इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छू लिए थे। वैश्विक अनिश्चितताओं, डॉलर में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर इन धातुओं की ओर रुख किया था। नतीजतन दोनों धातुओं की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर गईं। लेकिन रिकॉर्ड स्तर बनाने के बाद बाजार में अचानक आई मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के चलते इनकी कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया।
गुरुवार को एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक चांदी अपने हालिया उच्चतम स्तर से अब तक लगभग 1.59 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए झटका है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी। हालांकि, जो निवेशक लंबे समय से गिरावट का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
सोने की कीमतों में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है। एमसीएक्स पर सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि सोना डॉलर में ट्रेड होता है और महंगा पड़ने लगता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोना-चांदी की कीमतों में इस समय जो उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, वह कई वैश्विक कारकों का परिणाम है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, ब्याज दरों को लेकर संकेत, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़े और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव जैसे कारक कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा घरेलू स्तर पर रुपये की चाल भी कीमतों में अहम भूमिका निभा रही है।
चांदी की बात करें तो यह केवल निवेश का साधन ही नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य उद्योगों में इसकी मांग रहती है। ऐसे में वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती या तेजी का सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ता है। हालिया गिरावट के पीछे औद्योगिक मांग में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी को भी एक कारण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस समय सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव का जोखिम अधिक है, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट के स्तरों पर धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।
ज्वैलरी बाजार पर भी इस गिरावट का असर देखने को मिल सकता है। शादी-विवाह के सीजन में सोने-चांदी की मांग बढ़ती है। ऐसे में कीमतों में आई कमी ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अगर कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार में खरीदारी बढ़ सकती है।
आगे की दिशा को लेकर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता जारी रहने पर सोना फिर से मजबूत हो सकता है, जबकि अन्य का कहना है कि अगर डॉलर और ब्याज दरों में मजबूती बनी रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल इतना तय है कि सोना-चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। निवेशकों के लिए यह समय धैर्य और समझदारी से फैसले लेने का है। कीमतों में आई यह गिरावट जहां कुछ लोगों के लिए चिंता का विषय है, वहीं कई निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू बाजार की चाल पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।