सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, क्या अब खरीदने का सही समय है?
देशभर में आज यानी 4 अगस्त 2025 को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ये गिरावट ऐसे वक्त में आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक शुरू हो चुकी है, और बाजार को 6 अगस्त को रेपो रेट पर होने वाले फैसले का इंतजार है। पिछली बैठक में जब आरबीआई ने रेपो रेट को 6% से घटाकर 5.5% कर दिया था, तो बाज़ार में सोने की कीमतों में हलचल देखी गई थी। अब दोबारा ऐसी ही स्थिति बन रही है। इस बीच सोने की कीमतों में गिरावट से ग्राहकों के लिए यह सुनहरा मौका हो सकता है। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई से लेकर कोलकाता तक सभी प्रमुख महानगरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के भाव में थोड़ी गिरावट आई है। वहीं चांदी की कीमतें भी अब 1,13,000 रुपये से नीचे आ चुकी हैं। ट्रेडर्स मान रहे हैं कि रेपो रेट में संभावित कटौती से सोने की मांग फिर बढ़ सकती है। ऐसे में इस गिरावट को खरीदारी का अवसर माना जा रहा है।
दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में गिरा सोने का भाव
मुंबई में आज 24 कैरेट सोना ₹1,01,340 प्रति 10 ग्राम पर और 22 कैरेट सोना ₹92,890 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,01,490 और 22 कैरेट सोना ₹93,040 प्रति 10 ग्राम की दर पर मिल रहा है। अहमदाबाद और पटना में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है, जहां 24 कैरेट का रेट ₹1,01,390 और 22 कैरेट का ₹92,940 है।
चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट
4 अगस्त को चांदी की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है। आज चांदी ₹1,12,900 प्रति किलोग्राम की दर पर कारोबार कर रही है, जो कि पिछले हफ्ते ₹1,13,600 प्रति किलो से अधिक थी। यह गिरावट उद्योग जगत और आभूषण व्यापारियों के लिए राहत लेकर आई है।
क्या रेपो रेट और डॉलर की चाल से बदलता है सोने का रुख?
जी हां। सोने की कीमतें सिर्फ घरेलू मांग पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैक्टर्स जैसे डॉलर-रुपया विनिमय दर, ग्लोबल गोल्ड रेट, टैक्सेशन और इम्पोर्ट ड्यूटी पर भी निर्भर करती हैं। साथ ही जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने में निवेश करने की रुचि बढ़ जाती है, जिससे कीमतें प्रभावित होती हैं।
भारत में सोने की डिमांड और सांस्कृतिक महत्व
भारत में सोना केवल एक धातु नहीं बल्कि निवेश और परंपरा का प्रतीक है। शादी-ब्याह, त्योहार और पूजा के अवसरों पर सोने की मांग हमेशा बनी रहती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सोने की कीमतें स्थिर रहने की कोशिश करती हैं। निवेशक और ग्राहक दोनों ही ऐसे मौकों की तलाश में रहते हैं, जब थोड़ी गिरावट पर खरीदारी की जा सके।





