सोने के भाव में भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता
धनतेरस पर रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों में सोना करीब ₹7,600 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका–चीन के बीच संभावित व्यापार समझौते की खबरों ने सोने की चमक फीकी कर दी है। वहीं, चांदी के दामों में भी नरमी जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 28 अक्टूबर को स्पॉट गोल्ड 0.33% गिरकर 3,991 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 46.02 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।
गिरावट के पीछे क्या हैं प्रमुख कारण
सोने की कीमत में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार में स्थिरता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब डॉलर मजबूत होता है, तो विदेशी निवेशक सोने में निवेश घटा देते हैं। साथ ही, अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी सोने की मांग पर दबाव डाला है। हालांकि, लंबे समय के निवेशक अब भी इसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं, खासकर आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दौर में।
कैसे तय होती है सोने की कीमत
भारत में सोने की दरें हर दिन बदलती हैं क्योंकि इन पर वैश्विक बाजार, डॉलर की कीमत और स्थानीय टैक्स का सीधा असर पड़ता है। सोना डॉलर में ट्रेड होता है, इसलिए रुपये की कीमत घटने से सोना महंगा होता है। इसके अलावा, इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी और स्थानीय टैक्स भी भाव तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। त्योहारों और शादियों के मौसम में मांग बढ़ने से सोने की कीमतों में तेजी देखी जाती है, जबकि डॉलर की मजबूती के समय इसमें गिरावट आती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
हालांकि कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका हो सकता है। दीर्घकालिक नजरिए से सोना अब भी एक ‘सेफ हेवन’ एसेट माना जाता है। महंगाई या आर्थिक अनिश्चितता के समय इसकी कीमतें फिर तेजी पकड़ सकती हैं। इसलिए, निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं ताकि औसत लागत कम बनी रहे।
नोट- हमारे द्वारा दी गई सोने-चांदी की दरें सांकेतिक हैं और इसमें जीएसटी, टीसीएस और मेकिंग चार्ज जैसे अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं. सटीक दरों के लिए अपने स्थानीय जौहरी या ज्वैलर्स शॉप से संपर्क करें.