Intercontinental Ballistic Missile: ICBM ताकत का वैश्विक संतुलन: जानें किन देशों की मिसाइलें पहुंच सकती हैं अमेरिका तक?…सबसे ऊपर कौन सा देश है

Intercontinental Ballistic Missile

ICBM ताकत का वैश्विक संतुलन: किन देशों की मिसाइलें पहुंच सकती हैं अमेरिका तक?

रूस और चीन शीर्ष पर, उत्तर कोरिया-ईरान के दावों से बढ़ी चिंता; दुनिया फिर ‘मिसाइल युग’ के तनाव में

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों पर खतरे के बीच दुनिया एक बार फिर लंबी दूरी की घातक मिसाइलों की चर्चा में घिर गई है। खासकर सवाल यह उठ रहा है कि किन देशों के पास ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्षमता है, जो सीधे अमेरिका की धरती को निशाना बना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षमता केवल कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित है, जिनमें सबसे ऊपर रूस और चीन का नाम आता है।

भारत और इजरायल: तकनीक मजबूत, नीति संतुलित

India और Israel के पास भी लंबी दूरी की उन्नत मिसाइलें हैं। भारत की ‘अग्नि-5’ मिसाइल 5,000 से 8,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जबकि इजरायल की ‘जेरिको’ प्रणाली भी काफी सक्षम मानी जाती है। हालांकि दोनों देशों की सैन्य नीति मुख्यतः रक्षात्मक है और उनका फोकस क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर है, न कि वैश्विक शक्ति प्रदर्शन पर।

मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

हाल के घटनाक्रमों में Strait of Hormuz को लेकर United States और Iran के बीच बढ़ती तनातनी ने सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर बंकर-बस्टर बमों से हमला किया, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया। इस टकराव ने यह बहस तेज कर दी है कि कौन-से देश अमेरिका तक सीधा सैन्य वार करने में सक्षम हैं।

पहले नंबर पर रूस की घातक बढ़त

मिसाइल क्षमता के मामले में Russia को दुनिया में सबसे आगे माना जाता है। उसके पास ‘टोपोल-एम’ जैसी अत्याधुनिक ICBM हैं, जिनकी रेंज 11,000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। ये मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं और ध्रुवीय मार्गों से उड़ान भरते हुए अमेरिका के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती हैं। शीत युद्ध के दौर से ही रूस और अमेरिका के बीच यह ‘न्यूक्लियर बैलेंस’ बना हुआ है, जिसने दोनों देशों को प्रत्यक्ष युद्ध से दूर रखा है। रूस की मिसाइल तकनीक में लगातार हो रहे आधुनिकीकरण ने उसकी रणनीतिक ताकत को और मजबूत किया है।

दूसरे नंबर पर चीन की तेज रफ्तार प्रगति

China इस सूची में दूसरे स्थान पर आता है। पिछले दो दशकों में चीन ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ाया है। उसकी ‘DF-41’ मिसाइल को दुनिया की सबसे आधुनिक ICBM में गिना जाता है, जो लगभग 12,000 से 15,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। चीन की खासियत यह है कि वह जमीन के साथ-साथ पनडुब्बियों से भी लंबी दूरी की मिसाइल दाग सकता है। इससे उसकी ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता बेहद मजबूत हो जाती है, जो किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की गारंटी देती है।

उत्तर कोरिया: सीमित संसाधनों में बड़ा खतरा

North Korea ने अपने आक्रामक मिसाइल कार्यक्रम से दुनिया को चौंकाया है। कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उसने ऐसी ICBM विकसित करने का दावा किया है, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने कई सफल परीक्षण किए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उसकी तकनीक लगातार विकसित हो रही है। हालांकि विशेषज्ञों के बीच इसकी सटीकता और विश्वसनीयता को लेकर अभी भी बहस जारी है।

ईरान के दावे और वास्तविकता पर सवाल

Iran ने भी हाल ही में 10,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल तकनीक का दावा किया है। यदि यह पूरी तरह साबित होती है, तो ईरान भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जो अमेरिका तक सीधा हमला कर सकते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की इस क्षमता का पूर्ण परीक्षण और प्रमाण अभी सामने नहीं आया है। फिर भी मौजूदा हालात में यह दावा वैश्विक चिंता को बढ़ाने के लिए काफी है।

यूरोप की ताकत: सहयोगी लेकिन सक्षम

United Kingdom और France भी परमाणु और लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक में अग्रणी हैं। फ्रांस की स्वतंत्र परमाणु क्षमता और ब्रिटेन की पनडुब्बी आधारित प्रणाली उन्हें वैश्विक सुरक्षा ढांचे में अहम भूमिका देती है। हालांकि ये दोनों देश NATO के सदस्य हैं और अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं, इसलिए उनकी मिसाइल क्षमता को खतरे के बजाय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है।

बढ़ती मिसाइल दौड़: दुनिया के लिए चेतावनी

विशेषज्ञ मानते हैं कि ICBM तकनीक का प्र सार वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जैसे-जैसे अधिक देश लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहे हैं, वैसे-वैसे युद्ध का दायरा भी वैश्विक होता जा रहा है। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि दुनिया एक बार फिर ‘मिसाइल संतुलन’ के दौर में प्रवेश कर रही है, जहां शक्ति का प्रदर्शन ही सुरक्षा की गारंटी बनता जा रहा है।

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