मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट 20 नवंबर को समाजवादी पार्टी के लोकप्रिय विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हो गई है। विधानसभा सचिवालय ने उनके चले जाने के तुरंत बाद सीट को रिक्त घोषित करते हुए आदेश जारी कर दिया है। उनके निधन के साथ ही राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपचुनाव की आहट तेज हो गई है।
विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद सीट रिक्त, उपचुनाव अनिवार्य
20 नवंबर 2025 को बीमारी के चलते सपा विधायक सुधाकर सिंह का देहांत हो गया। वे लगातार दूसरी बार घोसी सीट से विजयी हुए थे और स्थानीय स्तर पर बेहद सक्रिय माने जाते थे। चुनाव नियमों के अनुसार, किसी सीट के अप्रत्याशित रूप से खाली होने पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। यही वजह है कि घोसी उपचुनाव जल्द घोषित होने की संभावना है।
घोसी का राजनीतिक इतिहास—लगातार चर्चा में रहनी वाली सीट
घोसी विधानसभा सीट पूर्वांचल की उन चुनिंदा सीटों में से है जहां बार-बार सियासी मुकाबला दिलचस्प रहा है। 2022 में भाजपा छोड़कर सपा में आए दारा सिंह चौहान ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर फिर भाजपा का दामन थाम लिया। इससे 2023 में फिर उपचुनाव हुए और राजनीति में नई हलचल मच गई।
2023 उपचुनाव—सुधाकर सिंह की ऐतिहासिक जीत
2023 के उपचुनाव में भाजपा ने दारा सिंह को दोबारा मौका दिया, जबकि सपा ने सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा। मुकाबला कांटे का था, लेकिन सुधाकर सिंह ने करीब 50 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज करते हुए सीट पर सपा का कब्जा कायम रखा। कृषि, गांव और स्थानीय मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता का भरोसा दिलाया था।
पूर्वांचल की राजनीति में घोसी का बढ़ता महत्व
अब विधायक के निधन के बाद यह सीट फिर उपचुनाव के लिए तैयार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोसी उपचुनाव सिर्फ मऊ जिले तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पूर्वांचल की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। भाजपा और सपा दोनों ही पार्टियाँ इस सीट को प्रतिष्ठा से जोड़कर देखती हैं और मुकाबला एक बार फिर बेहद कड़ा होने वाला है।





