नई दिल्ली। अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के बयान पर हंगामा बरपा, जब उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। साथ ही सोरोस ने भारत में जल्द ही एक लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद जताई थी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने इस बयान की निंदा की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तो सोरोस को अमीर और खतरनाक जिद्दी बूढ़ा बताया। कांग्रेस के जयराम रमेश ने भी उनके बयान से किनारा कर लिया। आखिर, सोरोस को इतना भाव क्यों मिल रहा है?
जॉर्ज सोरोस के बारे में जानने की कुछ बातें
- जॉर्ज सोरोस 1930 में हंगरी के बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में पैदा हुए। 9 साल के थे, तभी द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया। हंगरी में यहूदियों का नरसंहार हो रहा था। सोरोस का परिवार छिप कर गलत आइडी बनाकर भागा।
- 1945 में हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी और सोरोस के परिवार ने देश छोड़ने का फैसला किया। 1947 में सोरोस अपने परिवार के साथ लंदन आ गए।
- सोरोस के परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाने और रहने की थी। इस वक्त पैसा कमाने के लिए सोरोस ने कुली और वेटर का काम किए।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉर्ज सोरोस 1956 में लंदन से अमेरिका आ गए। सोरोस ने फाइनेंस और इंवेस्टमेंट सेक्टर में काम करने का फैसला किया।
1973 में ‘सोरोस फंड मैनेजमेंट’ के नाम से कंपनी बनाई। इसके बाद अमेरिकी शेयर मार्केट में पैसा इंवेस्ट करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे सोरोस ने छात्रवृत्तियां देनी शुरू कीं और आज इनकी कंपनी 100 से अधिक देशों तक पहुंच बना चुकी है। सोरोस ने 1993 में ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ की शुरुआत की। दावा है कि वह अब तक 32 अरब डॉलर दान कर चुके हैं।
सोरोस की संस्था ने 1999 में पहली बार भारत में प्रवेश किया। 2014 में ओपन सोसाइटी ने भारत में दवा, न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने और विकलांग लोगों को मदद करने वाली संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी। 2016 में भारत सरकार ने देश में इस संस्था के जरिए होने वाली फंडिंग पर रोक लगा दी।
जॉर्ज सोरोस का जुनून हद से आगे है
जॉर्ज सोरोस अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी को सबसे ज्यादा चंदा देनेवालों में हैं। 2003 में अपने एक इंटरव्यू में जॉर्ज सोरोस ने सोरोस ने बुश को हराने के लिए करीब 125 करोड़ रुपए खर्च करने की बात स्वीकार की थी। हालांकि, जॉर्ज बुश चुनाव जीत गए। बराक ओबामा, हिलेरी क्लिंटन और जो बाइडेन को राष्ट्रपति बनाने के लिए जॉर्ज सोरोस ने खूब पैसा खर्च किया।
जॉर्ज सोरोस चाहते थे कि ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन का ही हिस्सा रहे। इसके लिए उनके कहने पर ब्रिटेन में यूरोपीयन यूनियन में रहने के लिए कैंपेन चलाया गया। गार्डियन के मुताबिक इस कैंपेन पर 4 लाख पाउंड से ज्यादा खर्च हुआ। एक बार फॉक्स न्यूज से जॉर्ज सोरोस काफी ज्यादा चिढ़ गए थे। इसके बाद सोरोस ने 1 मिलियन डॉलर फॉक्स न्यूज को बर्बाद करने के लिए खर्च कर दिए।
2017 में जॉर्ज सोरोस ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ठग कह दिया था। सोरोस चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की भी जमकर आलोचना कर चुके हैं।
सोरोस को भारत से क्या लेना-देना है
जॉर्ज सोरोस दरअसल अभी तक उपनिवेशवादी मानसिकता में जी रहे हैं, जहां उन्हें लगता है कि अमेरिका सुपरपावर है और चूंकि वह अमेरिकी हैं तो उनका रास्ता ही एकमात्र सही रास्ता है। भारत अब जवाब दे रहा है, तो उनको बुरा लग रहा है। उनकी संस्था के वाइस प्रेसिडेंट सलिल शेट्टी अभी राहुल गांधी की यात्रा में दिखे थे। सोरोस दरअसल तमाम देशों की सरकारों को अपने मन-मुताबिक रखना चाहते हैं, लेकिन भारत को उनकी बात अधिक नहीं सुननी चाहिए।
सोरोस की भाषा में चूंकि धमकी का पुट है, तो बस उसका ख्याल रखना चाहिए।





