राजस्थान कांग्रेस में खत्म हो रही दूरी? गहलोत-पायलट की मुलाकात ने दिए सियासी संकेत

राजस्थान कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान अब धीरे-धीरे खत्म होती नजर आ रही है। शनिवार, 7 जून को कांग्रेस के दो दिग्गज नेता – Sachin Pilot और Ashok Gehlot – के बीच हुई मुलाकात ने पार्टी की आंतरिक राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।

क्या हुआ इस मुलाकात में?

पूर्व डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री रह चुके सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निवास पर पहुंचे। पायलट ने बताया कि वह अपने पिता राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर 11 जून को दौसा जिले के भंडाना गांव में होने वाले श्रद्धांजलि कार्यक्रम का न्योता देने आए थे। गौरतलब है कि जून 2000 में एक सड़क हादसे में राजेश पायलट का निधन हो गया था।

करीब एक घंटे चली बातचीत

इस मुलाकात का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि दोनों नेताओं के बीच पिछले कई वर्षों से कोई व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई थी। बातचीत करीब एक घंटे तक चली। 2020 में पायलट के बागी तेवर के बाद दोनों के रिश्तों में खुलकर तल्खी सामने आ चुकी थी, जो पार्टी नेतृत्व के स्तर पर भी महसूस की गई।

सोशल मीडिया पर साझा किए संदेश

मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो और पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा,
“राजेश पायलट और मैं 1980 में साथ में लोकसभा में पहुंचे थे। हमारे बीच लगभग 18 वर्षों का गहरा संबंध था। उनका असामयिक निधन कांग्रेस के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।”

वहीं, सचिन पायलट ने भी सकारात्मक संदेश देते हुए लिखा कि उन्होंने अशोक गहलोत से मुलाकात कर उन्हें 11 जून को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आने का निमंत्रण दिया है।

सुलह के संकेत?

इस मुलाकात को केवल औपचारिक न्योता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजस्थान कांग्रेस में सुलह और एकता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही पार्टी में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी तनाव बना हुआ था। अब 2028 के चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए एकजुटता दिखाना बेहद अहम हो गया है।

11 जून का कार्यक्रम: एकता का मंच?

अब सबकी नजरें 11 जून को दौसा में होने वाले राजेश पायलट की पुण्यतिथि कार्यक्रम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यदि अशोक गहलोत इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश होगा कि राजस्थान कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रही है।

राजनीति में संभावनाओं के दरवाजे कभी बंद नहीं होते। अगर यह संवाद और मुलाकातों का सिलसिला आगे भी जारी रहा, तो यह कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।

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