मध्यप्रदेश के सभी शहरों में बनेंगे ‘गीता भवन’
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों को मिलेगा नया विस्तार
मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने घोषणा की है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में चरणबद्ध तरीके से ‘गीता भवन’ बनाए जाएंगे। इन भवनों का उद्देश्य भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के 413 शहरों में गीता भवन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इंदौर और जबलपुर में बने गीता भवन की सफलता को देखते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
युवाओं को भारतीय दर्शन से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता भवन केवल भवन निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का एक प्रयास है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म के सिद्धांत और भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही इन भवनों को शोधार्थियों और विद्वानों के लिए भी उपयोगी बनाया जाएगा। यहां भारतीय दर्शन, संस्कृति और साहित्य से जुड़े अध्ययन और शोध के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
इंदौर-जबलपुर मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी
सरकार का मानना है कि Indore और Jabalpur में बने गीता भवन सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में सफल साबित हुए हैं। यहां नियमित रूप से धार्मिक, साहित्यिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इसी अनुभव को आधार बनाकर अब राज्य के अन्य शहरों में भी इसी तरह के केंद्र विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे नगरीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक गतिविधियों को नया मंच मिलेगा और लोगों को वैचारिक संवाद का अवसर मिलेगा।
चार शहरों में परियोजनाओं को मिली मंजूरी
योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में सरकार ने प्रारंभिक चरण में कुछ परियोजनाओं को स्वीकृति भी दे दी है। चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट के रूप में गीता भवन निर्माण को तकनीकी मंजूरी दी गई है। इनमें Rewa में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से, Chhindwara में 2.5 करोड़ रुपये, Katni में 2.4 करोड़ रुपये और Khandwa में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के छह नगर निगमों सहित करीब 100 नगर पालिकाओं में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
300 से अधिक शहरों में भूमि चिन्हांकन
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के शेष 313 नगरीय निकायों में भी गीता भवन निर्माण के लिए जमीन का चिन्हांकन किया जा चुका है। अब इन स्थानों पर भूमि आवंटन की प्रक्रिया जिला कलेक्टरों के माध्यम से पूरी की जा रही है। जैसे ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होगी, वहां भी निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस तरह चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में गीता भवनों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे गीता भवन
सरकार की योजना के अनुसार हर गीता भवन को एक बहुउद्देश्यीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इन भवनों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जहां बड़े स्तर पर सांस्कृतिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इसके अलावा यहां समृद्ध पुस्तकालय और हाई-टेक ई-लाइब्रेरी भी विकसित की जाएगी, ताकि विद्यार्थी और शोधार्थी भारतीय दर्शन, धर्मग्रंथों और साहित्य से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। गीता भवन में कैफेटेरिया और पुस्तक विक्रय केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जहां आध्यात्मिक और सांस्कृतिक साहित्य से जुड़ी किताबें तथा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया मंच
विशेषज्ञों का मानना है कि गीता भवन जैसे सांस्कृतिक केंद्र प्रदेश के शहरों में वैचारिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। यहां आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक मंच पर आ सकेंगे और भारतीय संस्कृति तथा परंपराओं पर चर्चा कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं में भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में प्रदेश के हर शहर में गीता भवन स्थापित होने के बाद यह पहल सांस्कृतिक संवाद और आध्यात्मिक चिंतन का एक बड़ा केंद्र बन सकती है।