बिहार के गया में इन दिनों पितृपक्ष मेला आस्था और श्रद्धा का बड़ा केंद्र बना हुआ है। मोक्ष की पावन भूमि माने जाने वाले गया में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण करने पहुंच रहे हैं। इस बार रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के किनारे सनातन परंपरा के अनुसार अपने पितरों का श्राद्ध किया। विदेशी श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के देवघाट पर जब विदेशी श्रद्धालु भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार पिंडदान और तर्पण करते नजर आए, तो यह दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गया।

विष्णुपद मंदिर गया में पितरों का तर्पण होता है और देशभर से लोग पहुंचते हैंगया को पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष धार्मिक महत्व वाला स्थान माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां 15 दिनों तक चलने वाले मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी से जुड़े अलग-अलग घाटों पर लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान करते हैं। देश के कई बड़े नेता और सेलिब्रिटी भी गया पहुंचकर अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर चुके हैं। इसी धार्मिक आस्था के कारण हर साल पितृपक्ष के दौरान गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

इस बार तर्पण करने वालों में विदेशी श्रद्धालु भी शामिल रहे
इस बार गया के पितृपक्ष मेले में विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने अपने पूर्वजों के लिए भारतीय परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण किया। रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। विदेशी श्रद्धालुओं ने पूजा के दौरान पारंपरिक परिधान भी धारण किए और पुरोहितों के मार्गदर्शन में सभी जरूरी धार्मिक रस्में पूरी कीं।

रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी से आए लोगों ने विधि-विधान से किया तर्पण
विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को जल अर्पित किया और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। पुरोहितों ने उन्हें सनातन परंपरा के अनुसार पूजा की विधि समझाई। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की। विदेश से आए लोगों के लिए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी, ताकि वे बिना किसी परेशानी के धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर सकें।

अलग धार्मिक पृष्ठभूमि से आए लोगों ने सनातन परंपरा के अनुसार पूजा कीविदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान कराने वाले पुरोहित लोकनाथ गौड़ के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान कई देशों से लोग गया पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें कई ऐसे श्रद्धालु भी हैं, जो सनातन धर्म की परंपराओं से प्रभावित हुए हैं। अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद इन लोगों ने गया में पितरों के श्राद्ध और तर्पण की परंपरा को समझा और उसी के अनुसार पूजा की। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गया पहुंचे हैं।

फल्गु नदी के किनारे विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के लिए की प्रार्थना
गया की फल्गु नदी के किनारे जब विदेशी श्रद्धालुओं ने पिंडदान और तर्पण किया, तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह भावुक और खास दृश्य रहा। सात समंदर पार से आए इन श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए पूरे श्रद्धाभाव से धार्मिक अनुष्ठान किया। पुरोहितों की देखरेख में उन्होंने पूजा की सभी प्रमुख रस्में पूरी कीं। गया की धार्मिक परंपरा और पितृपक्ष की मान्यताओं से जुड़कर विदेशी श्रद्धालुओं का यह अनुभव इस बार के मेले की खास तस्वीरों में शामिल हो गया है।





