ईंधन की कीमत स्थिर, लेकिन खपत में बड़ा बदलाव… अर्थव्यवस्था का क्या संकेत?

ईंधन की कीमत स्थिर, लेकिन खपत में बड़ा बदलाव… अर्थव्यवस्था का क्या संकेत?

7 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये, डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,810 रुपये पर बना हुआ है। यानी आम उपभोक्ता के लिए आज कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन ईंधन की खपत के आंकड़े अर्थव्यवस्था की एक अलग तस्वीर जरूर दिखा रहे हैं।

डीजल की मांग बढ़ी, तो क्या तेज हो रही आर्थिक गतिविधियां?

सितंबर में डीजल की बिक्री 71.6 लाख टन रही। अगस्त के मुकाबले इसमें 2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

डीजल की खपत को परिवहन, माल ढुलाई, कृषि, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इसकी सालाना बढ़ोतरी यह संकेत दे सकती है कि वाहनों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों में मांग बनी हुई है।

खास बात यह है कि सितंबर में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन की खपत 34.7 प्रतिशत बढ़ी। यह आंकड़ा बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों के लिए खासा महत्वपूर्ण है। यानी एक तरफ डीजल की मांग बढ़ रही है, दूसरी तरफ सड़क निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में भी तेजी दिखाई दे रही है।

पेट्रोल की तस्वीर भी दिलचस्प

सितंबर में पेट्रोल की खपत 36.7 लाख टन रही। अगस्त की तुलना में यह 4.4 प्रतिशत कम है, लेकिन सालाना आधार पर पेट्रोल की खपत 7.9 प्रतिशत ज्यादा रही।

यानी महीने-दर-महीने गिरावट को देखकर तस्वीर नकारात्मक नहीं कही जा सकती। सालाना आंकड़ा बताता है कि पिछले साल की तुलना में पेट्रोल की मांग अभी भी मजबूत है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि व्यक्तिगत वाहनों की आवाजाही और परिवहन गतिविधियों में दीर्घकालिक मांग बनी हुई है, भले ही किसी एक महीने में खपत कम-ज्यादा होती रहे।

एलपीजी ने बदली पूरी कहानी

सबसे दिलचस्प तस्वीर एलपीजी में दिखाई दे रही है।

सितंबर में एलपीजी की खपत 25.4 लाख टन रही। अगस्त के मुकाबले इसमें 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सितंबर 2025 की तुलना में खपत 9.2 प्रतिशत कम रही।

यानी एलपीजी की मासिक मांग बढ़ी है, लेकिन सालाना तुलना में गिरावट है। इससे पता चलता है कि रसोई गैस की खपत का रुझान पेट्रोल और डीजल से अलग दिशा में जा रहा है।

बिटुमिन बढ़ा, नैफ्था घटा

सितंबर में नैफ्था की खपत करीब 7 लाख टन रही, जो अगस्त से 16.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 25.2 प्रतिशत कम है।

इसके उलट बिटुमिन की खपत में 34.7 प्रतिशत की मासिक छलांग बताती है कि ईंधन बाजार के भीतर सभी उत्पादों की मांग एक जैसी नहीं चल रही। कहीं निर्माण और सड़क परियोजनाओं की गतिविधियां बढ़ रही हैं, तो कहीं औद्योगिक इस्तेमाल वाले उत्पादों की मांग कमजोर दिखाई दे रही है।

जेब पर राहत, लेकिन नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर

आज पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम स्थिर हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। सीएनजी की कीमत भी कई शहरों में स्थिर बनी हुई है।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इसलिए मौजूदा स्थिरता को स्थायी राहत मानना जल्दबाजी होगी।

कुल मिलाकर सितंबर के ईंधन आंकड़े दो तस्वीरें दिखाते हैं—एक तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता है, दूसरी तरफ डीजल और पेट्रोल की सालाना खपत में मजबूत वृद्धि दिखाई दे रही है। बिटुमिन की बढ़ती मांग बुनियादी ढांचे की गतिविधियों का संकेत देती है, जबकि एलपीजी और नैफ्था के आंकड़े अलग-अलग क्षेत्रों में मांग की बदलती तस्वीर सामने रखते हैं।

यानी पंप पर कीमत भले स्थिर हो, लेकिन ईंधन की खपत के आंकड़े अर्थव्यवस्था के भीतर चल रही हलचल की कहानी जरूर बता रहे हैं।

Exit mobile version